मध्य पूर्व के हालात और समुद्री रास्तों पर बढ़े तनाव के बीच दुनिया भर में ऊर्जा संकट की चिंता बढ़ गई है, लगातार बढ़ रही कच्चे तेल की कीमतों के बीच अमेरिका अब ईरान के तेल निर्यात पर लगी कुछ पाबंदियों में राहत देने पर विचार कर रहा है,अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा है कि अमेरिका ईरान के तेल निर्यात पर लगी कुछ पाबंदियों में राहत देने पर विचार कर सकता है. हालांकि अभी तक इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिकी प्रशासन विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय यानी OFAC से जुड़े कुछ प्रतिबंधों को सीमित स्तर पर नरम करने की संभावना पर चर्चा कर रहा है. माना जा रहा है कि इसका उद्देश्य वैश्विक बाजार में तेल की सप्लाई बढ़ाना और बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना हो सकता है.

इसी बीच ईरानी मीडिया ने दावा किया है कि अमेरिका ने ईरान के साथ शांति प्रक्रिया आगे बढ़ाने के लिए पांच बड़ी शर्तें रखी हैं. रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका ने कहा है कि हालिया सैन्य कार्रवाई और बमबारी से हुए नुकसान का कोई मुआवजा नहीं दिया जाएगा.
इसके अलावा अमेरिका ने ईरान से लगभग 400 किलोग्राम एनरिच्ड यूरेनियम सौंपने की मांग की है. एक अन्य शर्त में यह भी कहा गया है कि ईरान में केवल एक परमाणु केंद्र ही सक्रिय रहना चाहिए. अमेरिका ईरान की विदेशों में फ्रीज की गई संपत्तियों में से 25 प्रतिशत से अधिक रकम जारी करने के पक्ष में नहीं है. साथ ही लेबनान समेत क्षेत्र के दूसरे मोर्चों पर जारी संघर्ष को बातचीत के जरिए खत्म करने पर भी जोर दिया गया है.
हालांकि इन दावों की अब तक अमेरिका या ईरान की तरफ से आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.
दूसरी ओर ईरान ने भी अमेरिका को कड़ा संदेश दिया है. ईरान की तरफ से होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी खत्म करने की मांग की गई है. साथ ही चेतावनी दी गई है कि अगर ऐसा नहीं हुआ तो ओमान सागर अमेरिकी सेना के लिए “कब्रगाह” बन सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका ईरान पर लगी तेल पाबंदियों में किसी तरह की राहत देता है तो इसका असर वैश्विक तेल बाजार, पेट्रोल-डीजल की कीमतों और मध्य पूर्व की राजनीति पर साफ दिखाई दे सकता है. फिलहाल पूरी दुनिया की नजर अमेरिका और ईरान के बीच जारी गतिविधियों पर टिकी हुई है.