रूस ने समंदर में अपना सबसे बड़ा जंगी जहाज ‘एडमिरल नखिमोव’ उतारा, दुनिया भर में मची हलचल, NATO की उड़ी नींद

Moscow: रूस ने समंदर में अपना सबसे बड़ा और खूंखार जंगी जहाज ‘एडमिरल नखिमोव’ को उतार दिया है. यह 28 हजार टन का विशाल न्यूक्लियर क्रूजर है. इसके समंदर में उतरते ही दुनिया भर में हलचल मच गई है. इस कदम से नाटो देशों की नींद उड़ गई है. सोवियत संघ के पतन के बाद यह रूसी नेवी का सबसे बड़ा मॉर्डनाइजेशन प्रोग्राम है. यह जहाज अब रूस के नॉर्दर्न फ्लीट के हेडक्वार्टर सेवेरोमोर्स्क पहुंच गया है.

फ्रंटलाइन सर्विस में लौट आया

यह करीब तीन दशक बाद फ्रंटलाइन सर्विस में लौट आया है. इसे आर्कटिक में नाटो के प्रमुख समुद्री रास्तों के पास तैनात किया गया है. यह कोई आम जहाज नहीं है. यह हाइपरसोनिक मिसाइलों और आधुनिक हथियारों से लैस एक चलता फिरता किला है. यह अकेले ही दुश्मन के पूरे बेड़े को तबाह करने की ताकत रखता है. रूसी नेवी का यह जंगी जहाज आखिरी बार 1997 में समंदर में दिखा था. इसके बाद इसे उत्तरी रूस के सेवेरोडविंस्क में एक ड्राई डॉक में रख दिया गया था.

रूसी नेवी के लिए बहुत मुश्किल भरा

1990 का दशक रूसी नेवी के लिए बहुत मुश्किल भरा था. फंड की भारी कमी के कारण कई जंगी जहाजों को रिटायर करना पड़ा था. लेकिन ‘एडमिरल नखिमोव’ की किस्मत में कुछ और ही लिखा था. इसे कबाड़ में बदलने के बजाय रिपेयर करने का फैसला लिया गया. साल 2014 में इसका अपग्रेडेशन काम शुरू हुआ. करीब एक दशक की कड़ी मेहनत के बाद यह जहाज 2025 में ट्रायल्स के लिए समंदर में उतरा.

रूसी नेवी के लिए पूरी तरह तैयार

यह प्रोजेक्ट बहुत लंबा और चुनौतीपूर्ण था. लेकिन अब यह रूसी नेवी का नया फ्लैगशिप बनने के लिए पूरी तरह तैयार है. यह कीरोव क्लास का न्यूक्लियर बैटलक्रूजर है. इसे सोवियत नेवी के लिए खासतौर पर बनाया गया था. इसका निर्माण मई 1983 में लेनिनग्राद में शुरू हुआ था. इसे 30 दिसंबर 1988 को सोवियत नेवी में शामिल किया गया था. तब इसका नाम ‘कलिनिन’ रखा गया था. 1992 में इसका नाम बदलकर ‘एडमिरल नखिमोव’ कर दिया गया.

महान रूसी कमांडर के नाम पर रखा

यह नाम 19वीं सदी के एक महान रूसी कमांडर के नाम पर रखा गया था. कोल्ड वॉर के दौरान यह नेवी का सबसे खतरनाक सरफेस शिप माना जाता था. इसमें 20 पी-700 ग्रेनिट लॉन्ग-रेंज एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें लगी थीं. इन मिसाइलों की रेंज करीब 400 किलोमीटर थी. ये मिसाइलें न्यूक्लियर वारहेड भी ले जा सकती थीं. इसका मुख्य काम नाटो के कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स का शिकार करना था.

पुराने सिस्टम और फिक्स मिसाइलों पर निर्भर

अपग्रेडेशन से पहले यह सिर्फ कोल्ड वॉर युग का एक मिसाइल क्रूजर था. यह पुराने सिस्टम और फिक्स मिसाइलों पर पूरी तरह निर्भर था. लेकिन अब इसे आधुनिक तकनीक से बदल दिया गया है. इसके वेपन और सेंसर से लेकर प्रोपल्शन तक सब कुछ नया है. अब यह जहाज कई तरह के मल्टीपल मिशन को अंजाम दे सकता है. इसमें नए वर्टिकल लॉन्च सेल्स लगाए गए हैं. इसके रडार और नेविगेशन सिस्टम को डिजिटल तकनीक से बदल दिया गया है. इसके दोनों न्यूक्लियर रिएक्टर को पूरी तरह से नया जीवन दिया गया है.

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