New Delhi: मिडिल ईस्ट में युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक एयर इंडिया की 2,500 उड़ानें रद्द की जा चुकी हैं. युद्ध का असर सिर्फ मिडिल ईस्ट तक सीमित नहीं है. एयर इंडिया की ब्रिटेन (UK), यूरोप और उत्तरी अमेरिका जाने वाली उड़ानों को भी अब असुरक्षित एयरस्पेस से बचने के लिए लंबे रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है. इससे एयर इंडिया को भारी नुकसान हो रहा है.
शेड्यूल का केवल 30 फीसदी ही संचालित
एयर इंडिया के सीईओ (CEO) कैंपबेल विल्सन ने कर्मचारियों को लिखे एक आंतरिक पत्र में अमेरिका-ईरान युद्ध का एयरलाइंस पर पड़े रहे प्रभावों की जानकारी दी है. विल्सन के अनुसार, वर्तमान में स्थिति इतनी गंभीर है कि एयरलाइन अपने सामान्य मिडिल ईस्ट शेड्यूल का केवल 30 फीसदी ही संचालित कर पा रही है. कई देशों के हवाई क्षेत्र और एयरपोर्ट या तो पूरी तरह बंद हैं या सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक घोषित कर दिए गए हैं, जिसके कारण उड़ानों को रोकना मजबूरी बन गया है.
‘स्पॉट मार्केट’ में जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी
विल्सन ने बताया कि ‘स्पॉट मार्केट’ में जेट फ्यूल की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं. लंबे रास्तों के कारण न केवल ईंधन की खपत बढ़ी है, बल्कि यात्रा के समय में भी भारी इजाफा हुआ है. इसका सबसे बड़ा वित्तीय झटका अगले महीने से कंपनी की बैलेंस शीट पर दिखने की आशंका है. एयर इंडिया ने दूसरी भारतीय एयरलाइन्स की तरह नए टिकटों पर ईंधन सरचार्ज लगाना शुरू कर दिया है.
हर यात्री महंगे किराए देने को नहीं तैयार
हालांकि विल्सन ने माना कि हर यात्री महंगे किराए देने को तैयार नहीं है, इसलिए किराया बढ़ाने की एक सीमा है. सीईओ ने कहा कि आर्थिक अनिश्चितता के चलते यह जरूरी नहीं कि यात्री और कंपनियां पहले जितना सफर करें. कुछ लोग फिलहाल यात्रा टालने का फैसला कर सकते हैं. दुनिया में कुछ एयरलाइन्स पहले ही महंगे ईंधन के कारण उड़ानें घटाना शुरू कर चुकी हैं.
हालात के मुताबिक लेने पड़ सकते हैं फैसले
विल्सन ने संकेत दिया कि एयर इंडिया को भी हालात के मुताबिक फैसले लेने पड़ सकते हैं. इन सब चुनौतियों के बीच कुछ राहत की बात भी है. यूरोप और नॉर्थ अमेरिका के कुछ शहरों में नई मांग दिख रही है और एयरलाइन वहां अतिरिक्त फ्लाइट्स तैनात कर रही है.
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