बाल्टिक सागर न बन जाए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज? चुनौती देने पर यूरोप को पुतिन ने दी चेतावनी

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Russia President Baltic Sea Warning: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने यूरोपीय देशों को बाल्टिक सागर को लेकर चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि इस समुद्री रास्ते से जहाजों की आवाजाही रोकने या उस पर पाबंदी लगाने की कोशिश की गई, तो यहां भी फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य जैसे हालात बन सकते हैं. रूसी राष्ट्रपति ने स्पष्ट तौर पर कहा है कि रूस किसी से युद्ध नहीं चाहता, लेकिन उसके खिलाफ कोई कदम उठाया गया तो वह उसका जवाब देने से पीछे नहीं हटेगा.
29 अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि क्या यूरोप के देश चाहते हैं कि बाल्टिक सागर में भी वैसी ही स्थिति पैदा हो जाए, जैसी आज खाड़ी और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में देखने को मिलती है? उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस ऐसी परिस्थितियां पैदा नहीं करना चाहता है लेकिन सच ये है कि यदि किसी ने रूस को चुनौती दी तो मॉस्को चुप नहीं बैठेगा. उनकी ये धमकी मौजूदा परिस्थितियों में काफी अहम हो जाती है.

बाल्टिक सागर न बन जाए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

बता दें कि रूस को लगता है कि कुछ यूरोपीय देश बाल्टिक सागर में जहाजों की आवाजाही पर पाबंदियां लगा सकते हैं, जो रूस और यूरोप के लिए व्यापार और सुरक्षा के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है. यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कई देशों के व्यापार पर असर पड़ सकता है. यही वजह है कि पुतिन ने होर्मुज जलडमरूमध्य का उदाहरण दिया. यह दुनिया का एक अहम समुद्री रास्ता है, जहां किसी भी तरह की रुकावट से तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है.

यूरोप पर भड़के व्लादिमीर पुतिन

अफ्रीकी नेताओं के साथ हुए शिखर सम्मेलन के बाद पुतिन ने फिनलैंड और नॉर्वे के नेताओं के साथ हुई बातचीत का भी जिक्र किया. दरअसल, फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब और नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोरे ने हाल ही में उनसे फोन पर बात की थी, जिसपर यूरोप के कुछ नेताओं ने सवाल भी उठाए, लेकिन पुतिन ने कहा कि देशों के बीच बातचीत जारी रहनी चाहिए. उनके मुताबिक आपसी संबंध सुधारने के लिए बातचीत करना जरूरी है.
रूसी राष्ट्रपति ने यह भी दोहराया कि उनका देश यूरोप के साथ युद्ध नहीं चाहता. उन्होंने कहा कि रूस किसी भी स्थिति का सामना करने के लिए तैयार है, लेकिन वह टकराव नहीं चाहता, लेकिन अगर तनाव बढ़ा तो इसका नुकसान सभी देशों को उठाना पड़ेगा. ऐसी लड़ाई में किसी को भी असली जीत नहीं मिलेगी.

रूस और पश्चिमी देशों के बीच रिश्तों में तनाव

फिलहाल रूस और पश्चिमी देशों के बीच रिश्तों में तनाव बना हुआ है. इसके बावजूद मॉस्को यूरोप के साथ बातचीत और संबंध सुधारने के रास्ते खुले रखना चाहता है. बाल्टिक सागर को लेकर पुतिन का बयान इसी तनाव के बीच आया है. ऐसे में सभी की नजर इस बात पर है कि यूरोपीय देश रूस की चेतावनी पर क्या रुख अपनाते हैं और बाल्टिक सागर में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं. फिलहाल पुतिन का संदेश साफ है कि रूस समुद्री रास्तों पर किसी भी तरह की पाबंदी को गंभीरता से लेगा और टकराव बढ़ने पर जवाब देगा.
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