बांग्लादेश में कट्टरपंथियों ने श्रीराम प्रतिमा का निर्माण रोका, विरोध में सड़कों पर उतरे हजारों हिंदू

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Dhaka: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों के विरोध के बीच 81 फुट ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा परियोजना को रोक दिया गया. इसके विरोध में शुक्रवार रात हजारों हिंदू सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने मशाल जुलूस निकालकर उत्तरी बांग्लादेश के गैबांधा जिले में प्रस्तावित विशाल श्रीराम प्रतिमा परियोजना को रोकने के फैसले का विरोध किया.

जय श्रीराम के नारे गूंजे

शाहबाग से नेशनल प्रेस क्लब तक निकाले गए मार्च में जय श्रीराम के नारे गूंजे. प्रदर्शन में विभिन्न हिंदू संगठनों, छात्रों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया. विवाद का केंद्र गैबांधा जिले के पलाशबाड़ी क्षेत्र में बन रही 81 फुट ऊंची भगवान श्रीराम की प्रतिमा है. परियोजना में 53 फुट ऊंची भगवान कृष्ण और 30 फुट ऊंची भगवान शिव की प्रतिमा भी प्रस्तावित थी.

कट्टरपंथी संगठनों ने विरोध किया

करीब 22 करोड़ बांग्लादेशी टका की लागत वाले इस प्रोजेक्ट की शुरुआत 2025 में निजी फंडिंग से की गई थी. परियोजना का संचालन स्थानीय मंदिर समिति द्वारा किया जा रहा था. मंदिर समिति का आरोप है कि कुछ कट्टरपंथी इस्लामी संगठनों ने परियोजना का विरोध किया और निर्माण कार्य रोकने के लिए दबाव बनाया. हिंदू संगठनों का यह भी दावा है कि विरोध- प्रदर्शन के दौरान भगवान राम की तस्वीर का अपमान किया गया और उसे नुकसान पहुंचाया गया.

72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए मांग

प्रदर्शनकारियों ने सरकार को 72 घंटे का अल्टीमेटम देते हुए मांग की है कि दोषियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाए. राम प्रतिमा परियोजना को फिर से शुरू कराया जाए. हिंदू धार्मिक स्थलों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए. धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की रक्षा की जाए. संगठनों ने चेतावनी दी है कि मांगें पूरी नहीं होने पर देशव्यापी आंदोलन चलाया जाएगा. विरोध कर रहे कुछ इस्लामी संगठनों, जिनमें इमाम-उलमा परिषद का नाम भी सामने आया है, ने परियोजना की फंडिंग पर सवाल उठाए हैं.

पता लगाया जाए कि धन कहां से आया?

उन्होंने मांग की है कि इसकी वित्तीय जांच कराई जाए और यह पता लगाया जाए कि धन कहां से आया? यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब बांग्लादेश में हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों की सुरक्षा को लेकर पहले से चिंता व्यक्त की जाती रही है. विभिन्न अल्पसंख्यक संगठनों ने पिछले वर्षों में मंदिरों, धार्मिक स्थलों और समुदाय के लोगों पर हमलों के मामलों को लेकर कई बार सरकार का ध्यान आकर्षित किया है.

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