चीन के साथ कई समझौतों की तैयारी में बांग्लादेश, तीस्ता प्रोजेक्ट पर भी करेगा बात

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Bangladesh: भारत के साथ लंबी सीमा और गहरे सांस्कृतिक रिश्तों की दुहाई देने वाला बांग्लादेश अब ‘ड्रैगन’ सरपरस्ती में समझौतों की तैयारी में है. बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान अपनी चीन यात्रा के दौरान बीजिंग में कुछ ऐसा करने जा रहे हैं, जो भारत को असहज कर सकता है.

दरअसल, ढाका अब खुलकर बीजिंग के ‘चेकबुक डिप्लोमेसी’ के जाल में कदम बढ़ाने को उतावला दिख रहा है. बांग्लादेश और चीन के बीच इस यात्रा के दौरान करीब 15 से 17 द्विपक्षीय समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर होने का पूरा अनुमान है. इनमें 13 तो सिर्फ एमओयू हैं, जबकि दो बड़े समझौते, एक एक्शन प्लान और एक प्रोटोकॉल शामिल हैं.

तीस्ता प्रोजेक्ट पर बातचीत

बता दें कि इस भारी-भरकम डील की पुष्टि खुद बांग्लादेश के विदेश सचिव असद आलम सियाम ने की है. इस पूरी यात्रा का जो सबसे संवेदनशील और चौंकाने वाला पहलू है, वह है तीस्ता परियोजना. दरअसल, बांग्लादेशी विदेश सचिव असद आलम सियाम ने साफ तौर पर बताया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की इस चीन यात्रा के दौरान तीस्ता नदी परियोजना को लेकर बीजिंग के साथ खास बातचीत होगी. यह मुद्दा सीधे तौर पर भारत और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से लंबित और विवादित मामला रहा है.

जानकारो का कहना है कि भारत के इस रणनीतिक जल विवाद में चीन की एंट्री कराना, ढाका का एक ऐसा कदम है जिसे भारत को सीधे तौर पर आंख दिखाने के रूप में देखा जा रहा है. यदि ढाका ने इस प्रोजेक्ट की कमान चीन को सौंप दी, तो भारतीय सीमा के बिल्कुल करीब चीनी इंजीनियरों और तकनीक की मौजूदगी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन जाएगी.

नई नवेली सरकार का उतावलापन

बांग्लादेशी अखबार डेली स्टार के अनुसार, इस हाई-प्रोफाइल यात्रा के लिए बांग्लादेश ने अपने प्रतिनिधिमंडल को काफी छोटा और सीमित रखा है. विदेश मंत्रालय के मुताबिक, मलेशिया और चीन जाने वाले प्रतिनिधिमंडल में केवल 27 और 28 सदस्य ही शामिल किए गए हैं. ढाका सरकार का तर्क है कि वे फिजूलखर्ची से बचते हुए इसे बेहद तार्किक और काम के स्तर पर रखना चाहते हैं. लेकिन असली खेल इस प्रतिनिधिमंडल के आकार में नहीं, बल्कि चीन में होने वाली मुलाकातों के एजेंडे में छिपा है. ये बांग्लादेश की नई सरकार के उतावलेपन को जगजाहिर करती है.

बीजिंग पहुंचने के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान 25 जून को चीनी प्रधानमंत्री ली कियांग के साथ औपचारिक द्विपक्षीय वार्ता करेंगे, जहां दोनों देशों के बीच डेढ़ दर्जन समझौतों पर मुहर लगेगी. इसके ठीक अगले दिन यानी 26 जून को बांग्लादेशी प्रधानमंत्री की मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी.

मलेशिया में मजदूर, चीन में इंफ्रास्ट्रक्चर का सौदा

यदि दोनों देशों की यात्रा के पीछे बांग्लादेश के छिपे हुए आर्थिक हितों को देखें, तो यह पूरी तरह साफ हो जाता है. यात्रा के पहले पड़ाव यानी मलेशिया में ढाका का पूरा ध्यान अपने देश के लेबर मार्केट को विस्तार देने, व्यापार बढ़ाने और निवेश के नए अवसर तलाशने पर होगा. बांग्लादेश के लाखों कामगार मलेशिया की अर्थव्यवस्था का हिस्सा हैं और वहां से आने वाला रेमिटेंस ढाका के लिए बेहद जरूरी है.

वहीं दूसरी ओर चीन दौरे का असली मकसद पूरी तरह से रणनीतिक और बुनियादी ढांचे से जुड़ा है. बांग्लादेश इस यात्रा के माध्यम से चीन के साथ अपने बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर), अत्याधुनिक तकनीक, रीजनल कनेक्टिविटी और बड़े विकास क्षेत्रों में सहयोग को बहुत गहरा करना चाहता है. बांग्लादेश इस समय गंभीर आर्थिक चुनौतियों और विदेशी मुद्रा भंडार की कमी से जूझ रहा है, और ऐसे में उसे चीन की तरफ से बड़े वित्तीय पैकेज या आसान कर्ज की उम्मीद है.

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