बांग्लादेश चुनाव: भारत से सटे बॉर्डर इलाकों में जीती कट्टरपंथी ‘जमात’, देश की सुरक्षा एजेंसियों ने किया एलर्ट!

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New Delhi: बांग्लादेश के चुनाव ने भारत के एक और टेंशन को बढा दिया है, जो देश के लिए चिंताजनक है. इस मामले ने भारत की सुरक्षा एजेंसियों का ध्यान भी खींचा है. जमात-ए-इस्लामी ने पश्चिम बंगाल की सीमा से सटे कई इलाकों में मजबूत प्रदर्शन किया है. यह बढ़त भले ही सरकार बनाने के लिए काफी न हो लेकिन सीमा के पास उसका मजबूत होना नई चिंता पैदा कर रहा है.

BNP ने किया है जीत का दावा

गौरतलब है कि बांग्लादेश में 2024 के आंदोलन के बाद हुए पहले आम चुनाव में BNP ने जीत का दावा किया है. तारिक रहमान की अगुवाई वाली पार्टी को देशभर में बड़ी बढ़त मिली है. BNP को सिलहट, चटगांव और मयमेनसिंह जैसे बड़े और व्यावसायिक इलाकों में भारी समर्थन मिला. ये क्षेत्र शहरों, व्यापार और विदेश से आने वाले पैसे के लिए जाने जाते हैं.

भारत की सीमा से जुड़ा लंबा बेल्ट

वहीं जमात को जिन इलाकों में सफलता मिली वे ज्यादातर ग्रामीण और सीमा के पास के जिले हैं. सतखीरा, कुश्तिया, खुलना क्षेत्र के कुछ हिस्से और रंगपुर ऐसे इलाके हैं, जो पश्चिम बंगाल, असम और सिलीगुड़ी कॉरिडोर के करीब हैं. यह पूरा इलाका एक तरह से भारत की सीमा से जुड़ा लंबा बेल्ट बनाता है.

मस्जिदों और मदरसों से जुड़ा समर्थन

भारत की सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के मुताबिक यह सिर्फ शहरों का वोट नहीं है बल्कि गांवों, मस्जिदों और मदरसों के नेटवर्क से जुड़ा समर्थन है. ऐसे नेटवर्क धीरे-धीरे असर बढ़ाते हैं. एजेंसियों का कहना है कि सीमा के पास के जिलों में अगर जमात का स्थानीय असर बढ़ता है तो वहां रहने वाले अल्पसंख्यकों पर दबाव बढ़ सकता है. जमीन विवाद, डर का माहौल और धीरे-धीरे पलायन जैसी स्थिति बन सकती है.

भारत के सीमावर्ती जिलों में सामाजिक तनाव

अगर छोटी संख्या में भी लोग सीमा पार आते हैं तो इससे भारत के सीमावर्ती जिलों में सामाजिक तनाव बढ़ सकता है. पहले चर्चा ज्यादा संख्या में अवैध तरीके से सीमा पार करने वालों की होती थी. अब एजेंसियों का कहना है कि खतरा अलग तरह का हो सकता है. कम संख्या में ऐसे लोग आ सकते हैं जिनके पास खास मकसद हो जैसे- पैसे पहुंचाना, कट्टर विचार फैलाना या सोशल मीडिया के जरिए प्रचार करना.

कोई बड़ा हमला करने की बात नहीं करेगी

जानकारों का कहना है कि जमात सीधे तौर पर कोई बड़ा हमला करने की बात नहीं करेगी लेकिन माहौल ऐसा बन सकता है जिसमें कट्टर सोच को जगह मिले. शुक्रवार के भाषण मदरसों की पढ़ाई, सोशल मीडिया और सीमापार शादियों के जरिए असर धीरे-धीरे फैल सकता है.

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