बांग्लादेश में आतंकी हमलों की आशंका के बाद हाई अलर्ट, इस्लामी कट्टरपंथ और आतंकवाद को लेकर फिर बढ़ी चिंता

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Dhaka: बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ और आतंकवाद को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. रिपोर्ट के अनुसार देश में सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित आतंकी हमलों की आशंका के बाद हाई अलर्ट जारी किया है. संसद भवन, सुरक्षा ठिकानों, धार्मिक स्थलों, सार्वजनिक जगहों और मनोरंजन केंद्रों को निशाना बनाए जाने की आशंका जताई गई है. यह अलर्ट तब जारी किया गया जब एक प्रतिबंधित चरमपंथी संगठन के सदस्य को गिरफ्तार किया गया.

खुफिया एजेंसियों ने दी चेतावनी 

उसने दावा किया कि उसके संपर्क सेना से निकाले गए दो लोगों से थे. इसके बाद खुफिया एजेंसियों ने चेतावनी दी कि बांग्लादेश में फिर से कट्टरपंथी गतिविधियां बढ़ सकती हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि 2024 के आंदोलन और शेख हसीना सरकार के सत्ता से हटने के बाद देश में सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो गई थी. इस दौरान हिंसा, लूटपाट और जेल तोड़ने की घटनाएं सामने आईं.

जेल से भाग निकले 70 से ज्यादा आतंकी 

माना जाता है कि 70 से ज्यादा आतंकी जेल से भाग निकले थे. इसके अलावा कई अपराधियों और चरमपंथी संगठनों से जुड़े लोगों को जमानत भी मिली. सबसे ज्यादा चर्चा एबीटी प्रमुख जशिमुद्दीन रहमानी की रिहाई को लेकर हुई, जिसे 2013 में ब्लॉगर राजीब हैदर की हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि प्रतिबंधित संगठन हिज्ब उत-तहरीर बांग्लादेश फिर से सक्रिय होता दिख रहा है.

अंतरिम सरकार से प्रतिबंध हटाने की मांग

इस संगठन ने अंतरिम सरकार से अपने ऊपर लगा प्रतिबंध हटाने की मांग की थी. ढाका में कुछ छात्रों ने ISIS का झंडा लेकर इस्लामिक खिलाफत की मांग करते हुए प्रदर्शन भी किया, जिसके बाद कई लोगों को गिरफ्तार किया गया. रिपोर्ट के मुताबिक अंतरिम सरकार के दौरान कट्टरपंथ को बढ़ावा मिलने के आरोप भी लगे हैं. दावा किया गया कि दिसंबर, 2024 में नसीमुल गनी को गृह सचिव बनाया गया, जिन पर हिज्ब उत-तहरीर से जुड़े होने के आरोप हैं.

ढाका में मार्च टू खिलाफत प्रदर्शन

मार्च 2025 में संगठन ने ढाका में मार्च टू खिलाफत प्रदर्शन भी किया था, जिसे पुलिस ने रोक दिया. रिपोर्ट में कहा गया है कि बांग्लादेश में बढ़ता कट्टरपंथ सिर्फ देश ही नहीं बल्कि पूरे क्षेत्र की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बन सकता है. बांग्लादेश में सरकार भले बदल गई है लेकिन यूनुस सरकार में हुई मनमानी अब भी असर दिखा रही है. शेख हसीना के देश से जाने के बाद से कट्टरपंथी संगठनों पर से न सिर्फ प्रतिबंध हटा बल्कि बहुत से ऐसे लोगों को बाहर निकाला गया है, जो समाज में जहर बो रहे हैं.

संभावित आतंकी हमलों की आशंका के बाद हाई अलर्ट

यही वजह है कि बांग्लादेश में इस्लामी कट्टरपंथ और आतंकवाद को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है. रिपोर्ट के अनुसार देश में सुरक्षा एजेंसियों ने संभावित आतंकी हमलों की आशंका के बाद हाई अलर्ट जारी किया है.

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