‘भारत में मुस्लिम उत्पीड़न के आरोप झूठे’, बांग्लादेश सरकार ने जमात से मांगे सबूत, बोली-कोई प्रमाण नहीं

Dhaka: बांग्लादेश सरकार ने भारत में कथित मुस्लिम उत्पीड़न के नैरेटिव को सिरे से खारिज कर दिया है. देश के गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने साफ शब्दों में कहा है कि पश्चिम बंगाल और असम में मुसलमानों पर अत्याचार किए जाने का कोई प्रमाण सरकार के पास नहीं है. बांग्लादेश की प्रमुख इस्लामिक राजनीतिक पार्टी जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी दल लगातार आरोप लगा रहे थे कि भारत में भाजपा सरकार आने के बाद मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई बढ़ी है.

भारत में सांप्रदायिक माहौल

जमात-ए-इस्लामी और उसके सहयोगी दलों ने हाल ही में दावा किया था कि पश्चिम बंगाल और असम में मुसलमान लगातार उत्पीड़न का सामना कर रहे हैं. पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि भारत में सांप्रदायिक माहौल बनाया जा रहा है और भारत विरोधी ताकतें क्षेत्र में तनाव बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं. हालांकि इन आरोपों के समर्थन में किसी प्रकार का आधिकारिक दस्तावेज, रिपोर्ट या ठोस सबूत पेश नहीं किया गया.

दावों को सीधे तौर पर खारिज

बांग्लादेश सरकार ने इन दावों को सीधे तौर पर खारिज कर दिया. गृह मंत्री सलाहुद्दीन अहमद ने कहा कि सरकार को भारत में मुसलमानों पर अत्याचार से जुड़ी कोई आधिकारिक शिकायत या विश्वसनीय रिपोर्ट प्राप्त नहीं हुई है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि बिना प्रमाण के ऐसे संवेदनशील आरोप लगाना उचित नहीं है और इससे दोनों देशों के संबंधों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है.

भारत-बांग्लादेश संबंधों में सहयोग मजबूत

बांग्लादेश सरकार का यह रुख इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि हाल के वर्षों में भारत-बांग्लादेश संबंधों में सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, व्यापार और आतंकवाद विरोधी सहयोग लगातार मजबूत हुआ है. विशेषज्ञों का मानना है कि ढाका सरकार नहीं चाहती कि धार्मिक या राजनीतिक मुद्दों के जरिए दोनों देशों के रिश्तों में तनाव पैदा हो. खासकर तब, जब दक्षिण एशिया पहले से कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है.

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