Bangladesh Measles Outbreak: बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है. रविवार को खसरे जैसे लक्षणों वाले छह बच्चों की मौत के बाद वर्ष 2026 में खसरे से जुड़ी पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 873 हो गई है. स्वास्थ्य अधिकारियों के ताजा आंकड़े बताते हैं कि देश में संक्रमण का दायरा लगातार बढ़ रहा है और बच्चों पर इसका सबसे ज्यादा असर देखने को मिल रहा है.
बांग्लादेश के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले 24 घंटों में हुई सभी छह मौतों को खसरे से जुड़ी संदिग्ध मौतों की श्रेणी में रखा गया है. इसके बाद प्रयोगशाला में पुष्टि की गई खसरे से मौतों की संख्या 98 बनी हुई है, जबकि संदिग्ध मौतों का आंकड़ा बढ़कर 775 हो गया है.
24 घंटे में मिले 988 नए संदिग्ध मामले
देश में खसरे के नए मामलों की रफ्तार भी चिंता बढ़ा रही है. पिछले 24 घंटों के दौरान 988 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही 2026 में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या बढ़कर 1,36,320 हो गई है. इसी अवधि में 75 नए मामलों में प्रयोगशाला जांच के जरिए खसरे की पुष्टि हुई. इसके बाद वर्ष 2026 में लैब से पुष्टि किए गए कुल संक्रमितों की संख्या बढ़कर 17,115 हो गई है.
टीकाकरण में गिरावट को लेकर बढ़ी चिंता
बांग्लादेश में खसरे के मामलों में लगातार बढ़ोतरी के बीच टीकाकरण व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. खसरा एक टीका-रोकथाम योग्य बीमारी है और संक्रमण को नियंत्रित करने के लिए व्यापक टीकाकरण को महत्वपूर्ण माना जाता है. कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (GCDG) ने अपनी रिपोर्ट ‘Preventable Tragedy: Bangladesh’s 2026 Measles Outbreak’ में इस प्रकोप को हाल के वर्षों के गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया है. रिपोर्ट का दावा है कि मौजूदा संकट अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि लंबे समय से बन रही प्रतिरक्षा संबंधी कमी और स्वास्थ्य व्यवस्था में आई रुकावटों का परिणाम है.
वैक्सीन सप्लाई और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में रुकावट का दावा
GCDG की रिपोर्ट के अनुसार, 2024-2025 के दौरान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के समय वैक्सीन आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में व्यवधान आया. रिपोर्ट में नियमित टीकाकरण से बच्चों के छूटने, अतिरिक्त टीकाकरण कार्यक्रमों के रद्द होने, वैक्सीन खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाले बच्चों की समय पर पहचान नहीं हो पाने को भी संकट के कारणों में शामिल किया गया है.
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बांग्लादेश ने पहले WHO द्वारा स्वीकृत टीकों की खरीद UNICEF की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रणाली के माध्यम से की थी, लेकिन बाद में व्यवस्था में बदलाव कर खुली निविदा प्रक्रिया अपनाई गई. रिपोर्ट के अनुसार, UNICEF ने 2024 से 2026 के बीच संभावित वैक्सीन कमी को लेकर अंतरिम सरकार को कई औपचारिक पत्र भेजे और बैठकें भी कीं.
2025 में खसरे के टीकाकरण की कवरेज 56.2 प्रतिशत रहने का दावा
GCDG ने बांग्लादेशी अखबार समकाल में प्रकाशित विस्तारित टीकाकरण कार्यक्रम (EPI) के आंकड़ों का हवाला देते हुए दावा किया है कि 2025 में खसरे के टीकाकरण की कवरेज घटकर 56.2 प्रतिशत रह गई. रिपोर्ट के मुताबिक यह 2017 से 2025 के बीच सबसे कम स्तर था. रिपोर्ट में WHO के हवाले से यह भी कहा गया है कि 2024-2025 के दौरान बांग्लादेश में खसरा-रूबेला (MR) वैक्सीन की देशव्यापी कमी और नियमित टीकाकरण में गिरावट ने बच्चों की प्रतिरक्षा को कमजोर किया, जिससे 2026 में खसरे के प्रकोप के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनीं.
स्वास्थ्य व्यवस्था की कई कमियों का आरोप
GCDG की रिपोर्ट में देशभर में खसरे के फैलाव के पीछे प्रशासनिक और स्वास्थ्य व्यवस्था से जुड़ी कई कमियों का आरोप लगाया गया है. इनमें वैक्सीन की खरीद, परिवहन और आपूर्ति में रुकावट, वैक्सीन की कमी, रद्द किए गए EPI सत्र, MR1 और MR2 टीकाकरण कवरेज में गिरावट तथा समय पर टीका नहीं लगवा पाने वाले बच्चों की बढ़ती संख्या शामिल है. रिपोर्ट में अतिरिक्त टीकाकरण कार्यक्रमों की कमी और मौजूदा चिकित्सा प्रतिक्रिया को भी अपर्याप्त और धीमा बताया गया है. संगठन ने यह भी आरोप लगाया है कि इस वर्ष सत्ता में आने के बाद मौजूदा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) सरकार उन जोखिमों पर तेजी से कार्रवाई नहीं कर सकी, जिनके बारे में पहले से जानकारी उपलब्ध थी.
पारदर्शिता को लेकर भी उठाए सवाल
GCDG ने खसरे के प्रकोप के दौरान सरकारी स्तर पर जानकारी साझा करने में कमी और स्पष्टता के अभाव की भी आलोचना की है. संगठन के अनुसार, स्वास्थ्य संकट के दौरान आंकड़ों और स्थिति से जुड़ी जानकारी को सार्वजनिक करने में कमी मौजूदा स्वास्थ्य प्रतिक्रिया की एक गंभीर कमजोरी रही है.
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