Bangladesh Measles Outbreak: बांग्लादेश में खसरे का कहर, 24 घंटे में 8 और बच्चों की मौत, मृतकों की संख्या 900 के पार

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Bangladesh Measles Outbreak: बांग्लादेश में खसरे का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है. शनिवार को पिछले 24 घंटों के दौरान खसरे के कारण कम से कम आठ और बच्चों की मौत की खबर सामने आई है. इसके साथ ही इस साल बीमारी से हुई पुष्ट और संदिग्ध मौतों की कुल संख्या बढ़कर 902 हो गई है. लगातार बढ़ते मामलों और मौतों ने देश के सामने एक गंभीर स्वास्थ्य संकट खड़ा कर दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय (DGHS) ने शनिवार सुबह तक पिछले 24 घंटों में हुई इन मौतों की जानकारी दी. बांग्लादेशी समाचार एजेंसी UNB के अनुसार, सामने आईं आठ नई मौतों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है.

खसरे से 99 पुष्ट मौतें, संदिग्ध मौतों का आंकड़ा 803

रिपोर्ट के अनुसार, खसरे से हुई पुष्ट मौतों की संख्या फिलहाल 99 पर बनी हुई है. वहीं, संदिग्ध मौतों की संख्या बढ़कर 803 हो गई है. इस तरह पुष्ट और संदिग्ध मौतों को मिलाकर इस साल खसरे से जुड़ी मौतों का आंकड़ा 902 तक पहुंच गया है. स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, बीमारी के नए मामलों में भी लगातार बढ़ोतरी हो रही है. पिछले 24 घंटे में खसरे के 728 नए संदिग्ध मामले सामने आए हैं. इसके साथ ही देश में संदिग्ध मामलों की कुल संख्या 1,41,776 हो गई है. इसी अवधि में 70 नए पुष्ट मामले भी दर्ज किए गए. इसके बाद बांग्लादेश में खसरे के कुल पुष्ट मामलों की संख्या बढ़कर 17,800 हो गई है.

गंभीर स्वास्थ्य संकट में बदल रहा खसरे का प्रकोप

बांग्लादेश में खसरे के मामलों में लगातार हो रही तेज बढ़ोतरी के बीच एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय संस्था ने 2026 के इस प्रकोप को देश के हालिया इतिहास के सबसे गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकटों में से एक बताया है. संस्था ने इस बात को लेकर चिंता जताई है कि खसरा ऐसी बीमारी है, जिसे प्रभावी टीकाकरण के जरिए रोका जा सकता है. इसके बावजूद संक्रमण के मामलों और मौतों में लगातार बढ़ोतरी ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

रिपोर्ट में टीकाकरण व्यवस्था में आई बाधाओं का जिक्र

कनाडा स्थित ग्लोबल सेंटर फॉर डेमोक्रेटिक गवर्नेंस (GCDG) ने अपनी रिपोर्ट ‘Preventable Tragedy: Bangladesh 2026 Measles Outbreak’ में इस प्रकोप के पीछे कई कारणों का उल्लेख किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, आम लोगों को यह संकट अचानक सामने आया हुआ लग सकता है, लेकिन महामारी विज्ञान के नजरिए से इसे पूरी तरह अप्रत्याशित नहीं माना जा सकता. रिपोर्ट में 2024-25 के दौरान मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली पूर्व अंतरिम सरकार के समय टीकों की आपूर्ति और स्वास्थ्य कार्यक्रमों में आई बाधाओं का जिक्र किया गया है. इसके अलावा नियमित टीकाकरण से बच्चों के छूटने, निर्धारित पूरक टीकाकरण कार्यक्रमों के रद्द होने, वैक्सीन खरीद में प्रशासनिक देरी और जोखिम वाले लोगों की समय पर पहचान नहीं हो पाने जैसी वजहों को भी संकट से जोड़कर देखा गया है.

वैक्सीन खरीद की व्यवस्था में बदलाव का भी जिक्र

GCDG के अनुसार, बांग्लादेश लंबे समय से विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) द्वारा स्वीकृत टीकों की खरीद UNICEF की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति व्यवस्था के जरिए करता रहा था. हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक अंतरिम सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए खुली निविदा यानी ओपन टेंडर प्रणाली लागू कर दी. रिपोर्ट में UNICEF का हवाला देते हुए कहा गया है कि एजेंसी ने 2024 से 2026 के बीच संभावित वैक्सीन की कमी को लेकर अंतरिम सरकार को पांच से छह औपचारिक पत्र भेजे. इसके अलावा इस मुद्दे पर करीब 10 बैठकें भी की गईं, लेकिन स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ.

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