Bangladesh Politics: बांग्लादेश में 12 फरवरी को आम चुनाव होना है, लेकिन उससे पहले ही देश के चुनाव आयोग ने यूनुस सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है और इसका कारण है कि 12 फरवरी को चुनाव के साथ होने वाला जनमत संग्रह. आयोग ने अधिकारियों को निर्देश जारी कर कहा है कि यदि आप जनमत संग्रह का प्रचार करते हैं तो आपके खिलाफ सख्त कार्रवाई करेंगे. आयोग का यह निर्देश सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है.
दरअसल, बांग्लादेश की सरकार ने आधिकारिक रूप से इसके पक्ष में प्रचार करने की घोषणा की थी. उनका कहना है कि वो आम लोगों को इसको लेकर जागरूक करेगी, जिससे बांग्लादेश के संविधान में कुछ स्थाई बदलाव हो जाए.
क्या है जनमत संग्रह?
बता दें कि अंतरिम सरकार ने चुनाव के साथ एक संविधान में स्थाई बदलाव के लिए जनमत संग्रह कराने का फैसला किया है, जिसके तहत यदि 50 प्रतिशत से ज्यादा जनता जनमत संग्रह को लेकर हां करती है तो जुलाई चार्टर का नियम बांग्लादेश में लागू हो जाएगा. दरअसल, शेख हसीना को सत्ता से हटाने के बाद से ही यूनुस सरकार की कोशिश बांग्लादेश में लोकतांत्रिक सुधार करने की है. इसी के लिए जुलाई चार्टर तैयार किया गया है, जिसमें प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, चुनाव आयोग, सुप्रीम कोर्ट की शक्तियों के बारे में बताया गया है.
जुलाई चार्टर में 37 बदलावों की मांग
जुलाई चार्टर के मुताबिक, कोई भी शख्स 2 बार से ज्यादा प्रधानमंत्री पद पर नहीं रह सकेगा. इसी तरह पार्टी अध्यक्ष के साथ प्रधानमंत्री की कुर्सी नहीं संभाली जा सकती है. जुलाई चार्टर में कुल 37 बदलाव की मांग की गई है. सरकार का कहना है कि जनमत संग्रह के बाद इसे संसद में बदला नहीं जा सकता है. इसी के मद्देनजर सरकार का इसका प्रचार करना चाहती है.
क्यों जुलाई चार्टर पर हो रहा बवाल?
देश की अंतरिम सरकार, जमात ए इस्लामी और नाहिद इस्लाम की पार्टी जनमत संग्रह के पक्ष में है, जबकि तारिक रहमान की पार्टी बीएनपी और जातीय पार्टी इसका विरोध कर रही है. दरअसल, अगर सरकार इसके पक्ष में हां करती है तो इसका सीधा नुकसान बीएनपी को हो सकता है.
वहीं, सरकार का यह कदम चुनाव को प्रभावित कर सकता है, यही वजह है कि आयोग ने इसपर रोक लगाने का फैसला किया है. बांग्लादेश की मीडिया के मुताबिक आयोग के इस फैसले से सरकार के अधिकारी हतप्रभ हैं. चुनाव आयोग के इस कदम को लेकर सरकार के शीर्ष नेतृत्व में भारी असंतोष की खबरें भी सामने आई हैं.
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