Bangladesh Politics: बांग्लादेश की सत्ता में आते ही बांग्लादेश नेशनल पार्टी (BNP) ने जनमत संग्रह को मानने से इनकार कर दिया है. मंगलवार को तारिक रहमान समेत बीएनपी के सांसदों ने संवैधानिक सुधार आयोग के सदस्य के रूप में शपथ नहीं ली. बीएनपी के नेता सलाहुद्दीन अहमद का कहना है कि बीएनपी के इस कदम से जुलाई चार्टर का भविष्य अधर में लटक गया है.
दरअसल, बांग्लादेश में लोकतंत्र को सही करने के लिए यूनुस की अंतरिम सरकार ने जुलाई चार्टर का प्रस्ताव लाया था, इस प्रस्ताव पर जनमत संग्रह भी कराया गया था, जिस पर 50 प्रतिशत से ज्यादा नागरिकों ने सहमति जताई थी.
बीएनपी के सांसद ने नहीं ली शपथ…
प्रथम आलो के मुताबिक, जुलाई चार्टर को लागू करने की कवायद आज से ही शुरू होनी थी. सबसे पहले सभी सांसदों का संवैधानिक सुधार परिषद के सदस्य के रूप में शपथ कराना प्रस्तावित था, लेकिन जब बीएनपी के सांसद स्टेज पर आए, तो उन्होंने इसकी शपथ नहीं ली. इसकी अगुवाई खुद बीएनपी प्रमुख तारिक रहमान कर रहे थे.
जमात भी नहीं मानेगा जुलाई चार्टर
वहीं, जमात-ए-इस्लामी ने भी इसे मानने से इनकार कर दिया है. जमात के नायब अमीर सैयद अब्दुल्ला मुहम्मद ताहेर ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा है कि बीएनपी की तरह ही हमारे भी सांसद इस पद की शपथ नहीं लेंगे. हम अपने तरीके से काम करेंगे. जमात ए इस्लामी बांग्लादेश की सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी है.
जुलाई चार्टर से क्या-क्या बदलने वाला था?
दरअसल, बांग्लादेश में पिछले साल छात्रों ने विद्राह किया था, जिसके बाद अगस्त 2024 में शेख हसीना को इस्तीफा देना पड़ा और फिर मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में अंतरिम सरकार का गठन हुआ था. यूनुस सरकार ने लोकतंत्र में सुधार के लिए जुलाई चार्टर का प्रस्ताव लाया. इस प्रस्ताव के तहत कोई भी शख्स बांग्लादेश में एक बार में 10 साल से ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री नहीं रह सकते हैं जैसे प्रावधान बनाए गए.
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