‘कोई डर नहीं…मुझे पकड़ने आए तो कमांडो भेज दूंगा’, गिरफ्तारी वारंट पर नेतन्याहू की धमकी

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Benjamin Netanyahu: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने उन्हें गिरफ्तार करने का सपना देखने वालों को बड़ी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर कोई विदेशी सरकार अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायालय (ICC) के गिरफ्तारी वारंट के आधार पर उन्हें हिरासत में लेने की कोशिश करती है, तो इजरायल के स्पेशल कमांडो उनकी मदद के लिए कार्रवाई कर सकते हैं, वे हमेशा तैयार हैं. अपने अमेरिका दौरे के दौरान एक इंटरव्यू में नेतन्याहू ने कहा कि उन्हें उन देशों में जाने से कोई डर नहीं है, जिन्होंने 2024 में ICC के अरेस्ट वारंट का समर्थन किया है.

दरअसल नेतन्याहू से जब पूछा गया कि क्या विदेश में गिरफ्तारी का खतरा या मेडिकल इमरजेंसी जैसी किसी अचानक स्थिति में पकड़े जाने की आशंका उन्हें परेशान करती है, तो उन्होंने कहा कि “हां, मैं इसके बारे में सोचता हूं. लेकिन हमारे पास स्पेशल फोर्सेज हैं. मैंने खुद 5 साल तक सेना में सेवा की है.”

ममदानी की ओर नेतन्याहू का इशारा?

इजरायली प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने यह भी कहा कि वह न्यूयॉर्क जाएंगे. उन्होंने न्यूयॉर्क के मेयर जोहरान ममदानी की उस मांग को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अमेरिकी अधिकारियों से नेतन्याहू के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा था. ममदानी के बयान पर नेतन्याहू ने कहा कि “मैं इस चुने हुए नेता के सामने सच बोलूंगा. वो न्यूयॉर्क के लोगों को आपस में बांट रहे हैं, शहर के यहूदियों को दूसरे लोगों के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं.”

इजरायली कार्रवाई को लेकर दुनिया भर में चिंता

बता दें कि मेयर जोहरान ममदानी पहले ही नेतन्याहू को “युद्ध अपराधी” बता चुके हैं. ममदानी ने कहा है कि गाजा युद्ध के दौरान इजरायल की कार्रवाई को लेकर दुनिया भर में चिंता है, लेकिन न्यूयॉर्क शहर प्रशासन के पास ICC के वारंट को लागू करने का कोई अधिकार नही है. उन्होंने कहा कि यह जिम्मेदारी अमेरिकी संघीय एजेंसियों की है. वहीं, दूसरी ओर अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप, जो नेतन्याहू के करीबी सहयोगी हैं, उन्होंने भरोसा दिलाया है कि अमेरिका आने पर नेतन्याहू को गिरफ्तार किए जाने का कोई खतरा नहीं है.

दरअसल, ICC ने नवंबर 2024 में नेतन्याहू के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किया था. कोर्ट का कहना है कि गाजा में इजरायली सैन्य अभियान के दौरान युद्ध अपराध और मानवता के खिलाफ अपराध किए जाने के शक के आधार पर यह वारंट जारी किया गया था.

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