US ने ब्राजील राजदूत रिबेरो का रद्द किया वीजा, लूला सरकार ने अमेरिकी कार्रवाई को बताया राजनीतिक

Washington: ब्राजील और अमेरिकी के बीच तनाव अब कूटनीतिक स्तर तक पहुंच गया है. अमेरिका ने वॉशिंगटन में तैनात ब्राजील की राजदूत मारिया लुइजा रिबेरो वियोटी का वीजा रद्द कर दिया है. US ने इसे ब्राजील की ओर से उठाए गए कदमों का जवाब यानी पारस्परिक कार्रवाई बताया है. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अगर ब्राजील ट्रंप द्वारा ब्रासीलिया में अमेरिकी राजदूत के लिए नामित डैनी पेरेज की नियुक्ति को मंजूरी देता है, तो वीजा संबंधी फैसला वापस लिया जा सकता है.

अमेरिकी कार्रवाई राजनीतिक

ब्राजील सरकार ने अमेरिकी कार्रवाई को राजनीतिक बताया है. उसका आरोप है कि वीजा रद्द करने का कदम अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश का हिस्सा हो सकता है. ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा की सरकार और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के बीच तनाव लगातार बढ रहे हैं. अमेरिका का कहना है कि ब्राजील ने पिछले महीने दो अमेरिकी राजनयिकों को वीजा देने से इनकार किया था. इन अमेरिकी अधिकारियों की ब्राजील यात्रा को लेकर ब्राजील सरकार ने चुनावी प्रक्रिया और उसकी निष्पक्षता से जुड़े सवाल उठाए थे.

ट्रंप के नामित उम्मीदवार की नियुक्ति को मंजूरी

इसके अलावा वॉशिंगटन ब्रासीलिया में अमेरिकी राजदूत के लिए ट्रंप के नामित उम्मीदवार की नियुक्ति को मंजूरी देने में ब्राजील की देरी से भी नाराज है. ट्रंप प्रशासन का कहना है कि उसने ब्राजील को अपना रुख बदलने का मौका देने के लिए यह कदम कई बार टाला था. ब्राजील में लूला दोबारा राष्ट्रपति पद की दौड़ में हैं और उनका मुकाबला पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे फ्लावियो बोल्सोनारो से होने की उम्मीद है. फ्लावियो को ट्रंप प्रशासन और अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन मिलता दिखाई दे रहा है.

लूला के लगातार खराब हो रहे हैं रिश्ते 

ब्राजील की मुश्किल सिर्फ वॉशिंगटन तक सीमित नहीं है. पड़ोसी अर्जेंटीना के राष्ट्रपति जेवियर मिलेई के साथ भी लूला के रिश्ते लगातार खराब हो रहे हैं. मिलेई द्वारा लूला के खिलाफ लगातार तीखी टिप्पणियों के बाद ब्राजील ने अर्जेंटीना में अपनी राजनयिक मौजूदगी कम करने का ऐलान किया है. ब्राजील ने पहले ही अपने राजदूत जूलियो बिटेली को ब्यूनस आयर्स से वापस बुला लिया था और अब वहां राजदूत के बजाय निचले स्तर के राजनयिक प्रतिनिधि के जरिए काम चलाया जा रहा है.

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