BRICS समिट के बीच यूरोप और पश्चिम एशिया से बड़ी खबरें सामने आई हैं, जिसने कूटनीतिक और आर्थिक बाजारों में हलचल मचा दी है. दरअसल, यूक्रेन से एक ऐसा इशारा मिला है, जिसके बाद जंग खत्म होने के आसार नजर आने लगे हैं, वहीं, दूसरी ओर BRICS के मंच पर तनाव खत्म करने की कोशिशों के बीच ग्लोबल मार्केट को एक बड़ा झटका लगा है.
दरअसल, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने संकेत दिया है कि वे रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ आमने-सामने की बातचीत के लिए तैयार हैं. ये बातचीत इस साल दिसंबर में अमेरिका में होने वाले G20 शिखर सम्मेलन के दौरान हो सकती है. इस दाैरान जेलेंस्की से सवाल किया गया कि यदि पुतिन और उन्हें G20 बैठक में बुलाया जाता है, तो क्या वो पुतिन से मिलेंगे? इस पर जेलेंस्की ने सीधा और साफ जवाब दिया ‘हां, बिल्कुल. हमें वहां जाना होगा, मिलना होगा, बात करनी होगी और फैसले लेने होंगे’.
‘बातें नहीं, नतीजा चाहिए’, जेलेंस्की की शर्त
जेलेंस्की ने साफ साफ कहा है कि अब केवल खोखले भाषणों और बातों का वक्त निकल चुका है. उन्होंने कहा कि ‘ये सिर्फ शब्दों की बात नहीं है. मैं उनसे क्या कहूंगा या वो मुझसे क्या कहना चाहते हैं, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. फर्क सिर्फ नतीजे से पड़ता है. नतीजा आना चाहिए, बस बात खत्म’.
जंग खत्म कराने की कोशिशों के तहत अमेरिकी दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर ने हाल ही में मॉस्को और कीव का दौरा किया था, जिसे जेलेंस्की ने एक बहुत अच्छा संकेत बताते हुए कहा कि अमेरिकी टीम का मॉस्को के साथ-साथ कीव आना हमारे लोगों के प्रति सम्मान का सबूत है.
पश्चिम एशिया में अचानक बढ़ा तनाव, 8% तक उछले कच्चे तेल के दाम
वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची भी ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल हुए, जहां वो जंग खत्म करने की बातें कर रहे हैं. ऐसे वक्त में पश्चिम एशिया से चिंता में डाल देने वाली खबर आई है. समुद्री क्षेत्र में भड़की चिंगारी ने पूरी दुनिया के तेल बाजार में आग लगा दी. पिछले एक हफ्ते के दौरान अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में 8% से ज्यादा की भारी तेजी दर्ज की गई.
4 सितंबर को जो क्रूड ऑयल 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बिक रहा था, वो हफ्ते के मध्य में अचानक उछलकर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया, जो कि पिछले चार महीनों का सबसे ऊंचा स्तर है.
तेल बाजार का पूरा गणित
- ब्रेंट क्रूड: ग्लोबल मार्केट में ब्रेंट क्रूड हफ्ता खत्म होते-होते 104.61 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. शुक्रवार को भले ही इसमें थोड़ी गिरावट आई, लेकिन ये हफ्ते की शुरुआत वाले 95.08 डॉलर के मुकाबले अभी भी काफी ऊपर है.
- अमेरिकी क्रूड: अमेरिका का WTI क्रूड ऑयल भी हफ्ते के आख़िर में 100.05 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ. जबकि हफ्ते की शुरुआत में ये महज 91.48 डॉलर के आसपास था.
- भारतीय वायदा बाजार: भारत के वायदा बाजार MCX पर भी कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल देखने को मिला. हफ्ते के दौरान सितंबर कॉन्ट्रैक्ट का रेट 8,563 रुपए से बढ़कर 8,905 रुपए प्रति बैरल तक पहुंच गया था. हालांकि, बाद में बाजार थोड़ा ठंडा पड़ा और भाव 8,350 रुपए के आसपास आकर बंद हुआ.
भारत की जेब पर सीधा असर, क्यों बढ़ सकती है देश की चिंता?
कच्चे तेल में आई इस तेजी का सीधा और भारी असर भारत पर पड़ता है. भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से आयात करता है.
- रुपये पर दबाव: अगर तेल 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना रहता है, तो भारत को तेल खरीदने के लिए ज़्यादा डॉलर खर्च करने पड़ेंगे. इससे अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया कमजोर होता है.
- महंगाई का खतरा: महंगा क्रूड ऑयल देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतों, माल ढुलाई और रोज़मर्रा की चीजों को महंगा बना सकता है.
- कंपनियों पर मार: सरकारी तेल कंपनियों का मुनाफा घटेगा. इसके अलावा एविएशन और केमिकल सेक्टर की कंपनियों की लागत भी बढ़ जाएगी.