BRICS बाजार में शॉपिंग करती दिखीं ईरानी राष्ट्रपति की बेटी जहरा पेजेश्कियन, पारंपरिक कला और संस्कृति का जमकर लिया आनंद

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Zahra Pezeshkian: 18वें ब्रिक्स समिट के बीच शनिवार को दिल्ली के नेशनल क्राफ्ट्स म्यूजियम में लगे ‘ब्रिक्स बाजार’ में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन की बेटी जहरा पेजेश्कियन भी पहुंचीं. जहां उन्होंने भारत और अन्य ब्रिक्स देशों की पारंपरिक कला, संस्कृति और हैंडलूम का जमकर आनंद लिया.

इस दौरान हरा पेजेश्कियन अकेले नहीं, बल्कि अपने पति हसन मजीदी के साथ ब्रिक्स बाजार घूमने आई थीं. इस खास दौरे पर भारत की केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री अन्नपूर्णा देवी भी उनके साथ मौजूद रहीं. उन्होंने जहरा का गर्मजोशी से स्वागत किया और उन्हें पूरा म्यूजियम घुमाया.

भारतीय कारीगरी, मिट्टी के बर्तनों को निहारा

बता दें कि क्राफ्ट्स म्यूजियम में लगे स्टॉल्स पर जहरा ने भारतीय कारीगरी का कमाल देखा. उन्होंने भारतीय हैंडलूम, पारंपरिक कपड़ों और मिट्टी के बर्तनों को बहुत ध्यान से देखा. भारतीय टेक्सटाइल की विविधता देखकर वो काफी प्रभावित नजर आईं. इस दौरान उन्होंने वहां मौजूद लोकल कारीगरों से बातचीत भी की और उनकी मेहनत और हुनर की जमकर तारीफ की.

क्या है ब्रिक्स बाजार का मकसद

दरअसल, ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान इस बाजार को लगाने का मकसद सदस्य देशों की कला और कारीगरी को दुनिया के सामने लाना है. इसमें ब्रिक्स से जुड़े अलग-अलग देशों के पारंपरिक क्राफ्ट्स और आर्टिसनल प्रोडक्ट्स के स्टॉल्स लगाए गए हैं, जो सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ावा देते हैं.

केंद्रीय मंत्री ने शेयर की तस्वीरें

इस बीच, केंद्रीय मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने इस मुलाकात की तस्वीरें भी अपने सोशल मीडिया अकाउंट X पर शेयर कीं. उन्होंने लिखा कि जहरा पेजेश्कियन के साथ ये मुलाकात बेहद सुखद रही. कला और क्राफ्ट्स का ये जश्न ब्रिक्स देशों के बीच के रिश्तों को और मजबूत बनाता है.

तस्वीरों में जहरा पेजेश्कियन भारतीय कला और संस्कृति को समझने में काफी दिलचस्पी लेती दिखीं. उन्होंने ब्रिक्स देशों के स्टॉल्स से खास प्रोडक्ट्स एक्सप्लोर किए और भारतीय पारंपरिक क्राफ्ट्समैनशिप की बारीकियों को समझा.18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की कूटनीतिक और गंभीर बैठकों के बीच ये सांस्कृतिक दौरा चर्चा का विषय बन गया है. इस दौरे ने साबित किया कि ब्रिक्स सम्मेलन सिर्फ राजनीति या अर्थव्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि ये देशों को अपनी कला और संस्कृति के जरिए एक-दूसरे से जुड़ने का भी बड़ा मंच है.

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