कैंसर पर बड़ी जीत, चिकित्सा वैज्ञानिकों ने बच्चों के जानलेवा ब्रेन ट्यूमर का खोजा इलाज, तैयार की नई थेरेपी

Health Tips: भारत को बाल चिकित्सा और ऑन्कोलॉजी के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सफलता मिली है. जिसे अब तक लगभग असंभव माना जाता था. बच्चों में होने वाले सबसे घातक, दर्दनाक और लाइलाज समझे जाने वाले ब्रेन ट्यूमर डिफ्यूज मिडलाइन ग्लियोमा के इलाज में वैज्ञानिकों ने एक नया रास्ता खोज निकाला है. शोधकर्ताओं ने इस बीमारी के लिए जिम्मेदार आनुवंशिक म्यूटेशन को क्रैक कर ऐसी थेरेपी तैयार की है जो पारंपरिक इलाज की तुलना में मरीजों का जीवनकाल लगभग दोगुना कर रही है.

वैज्ञानिक सफलता ‘ऐतिहासिक’

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के पीडियाट्रिक ब्रेन ट्यूमर सेंटर की निदेशक डॉ. सबाइन मुलर ने इस वैज्ञानिक सफलता को ‘ऐतिहासिक’ करार दिया है. बता दें कि दशकों से इस खतरनाक कैंसर से पीड़ित बच्चों के बचने की उम्मीद न के बराबर थी. डिफ्यूज मिडलाइन ग्लियोमा ब्रेन ट्यूमर बच्चों के दिमाग के बेहद संवेदनशील हिस्सों को प्रभावित करता है. इसके शुरुआती लक्षणों में शामिल हैं. आंखों से धुंधला दिखना, चेहरे का एक हिस्सा लटक जाना और चलते समय शरीर का संतुलन खोना.

बच्चे का दिमाग पूरी तरह सचेत

बीमारी बढ़ने के महज एक साल के भीतर पीड़ित बच्चा बोलने, भोजन निगलने और चलने-फिरने की क्षमता पूरी तरह खो देता है. इस बीमारी का सबसे क्रूर और दुखद पहलू यह है कि पूरे शरीर के निष्क्रिय होने के बावजूद बच्चे का दिमाग पूरी तरह सचेत, सक्रिय और जागरूक रहता है. वर्ष 2012 में वैज्ञानिकों को पता चला कि यह ट्यूमर हिस्टोन नामक उस विशेष प्रोटीन के टूटने या म्यूटेशन के कारण पनपता है जिस पर डीएनए लिपटा होता है.

एक क्रांतिकारी दवा का नैदानिक परीक्षण

मिशिगन विश्वविद्यालय के डॉ. कार्ल कोशमान और उनकी रिसर्च टीम ने जैज फार्मास्यूटिकल्स के साथ मिलकर ‘ONC-201’ नामक एक क्रांतिकारी दवा का नैदानिक परीक्षण किया. यह दवा कैंसर कोशिकाओं के मेटाबॉलिज्म में बदलाव लाकर क्षतिग्रस्त हिस्टोन प्रोटीन की मरम्मत करती है. परीक्षण के नतीजों में पाया गया कि ‘ONC-201’ दवा के इस्तेमाल से मरीजों का औसतन जीवनकाल बढ़कर 22 महीने हो गया जो कि पुराने पारंपरिक तरीकों के मुकाबले लगभग दोगुना है.

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