चीनी सेना पर मंडरा रहा संकट! क्या जंग लड़ने के लिए तैयार है जिनपिंग की आर्मी? रिपोर्ट में हुआ खुलासा

China Military Crisis : चीनी सेना संकट में घिरती हुई नजर आ रही है. पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) में चल रहे भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की वजह से एक नए तरह का संकट उठ खड़ा हुआ है. हाल के दिनों में कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि चीन की सेना में चल रही भ्रष्टाचार विरोधी कार्रवाई से उसकी सैन्य कमान व्यवस्था चरमरा रही है. बता दें कि इससे चीनी सेना की ताकत पहले से और उसके रिफॉर्म को लेकर किए जा रहे प्रयास प्रभावित हो सकते हैं. बताया जा रहा है कि भ्रष्टाचार विरोधी अभियान राष्ट्रपति शी जिनपिंग के नेतृत्व में शुरू हुआ है.

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार लंदन स्थित इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) की वार्षिक ‘मिलिट्री बैलेंस’ रिपोर्ट ने इस मुद्दे पर गंभीर दावे किए हैं. रिपोर्ट का कहना है कि इस अभियान के कारण PLA के उच्च कमान में गंभीर कमियां उभरी हैं. बता दें कि जिनपिंग का भ्रष्टाचार विरोधी अभियान ने PLA के संराचत्मक ढांचे तक को हिला दिया है. बड़े पैमाने पर जांच के कारण PLA के उच्च पदों पर बड़ी कमियां उजागर हुई हैं और जब तक खाली पद भरे नहीं जाएंगे तब तक संगठनात्मक स्तर पर दिक्कत बनी रहेगी.

गहरी हैं PLA में भ्रष्टाचार की जड़ें 

जानकारी के मुताबिक, PLA में भ्रष्टाचार की जड़ें गहरी हैं, जो कि काफी लंबे समय से चली आ रही हैं. बताया जा रहा है कि 1980 और 1990 के दशक में, PLA व्यावसायिक गतिविधियों में संलग्न थी, जिससे भ्रष्टाचार फला-फूला. इसके साथ ही होटल, रियल एस्टेट और अन्य व्यवसायों से जुड़ी सेना के अधिकारियों ने व्यक्तिगत लाभ कमाए, जो सैन्य अनुशासन और क्षमता को कमजोर कर रहा था. बता दें कि शी ने इस पर कड़ा प्रहार किया, और 2015 से PLA की रिस्ट्रक्चरिंग शुरू की गई. इसमें अब तक, हजारों अधिकारियों को जांच के घेरे में लाया गया है, जिसमें दर्जनों जनरल स्तर के नेता शामिल हैं.

चीन की सबसे बड़ी कार्रवाई

इसके साथ ही रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग की कार्रवाई के कारण समस्या सेंट्रल मिलिट्री कमीशन (CMC), क्षेत्रीय थिएटर कमांड, हथियार खरीद एजेंसियों और रक्षा अकादमिक संस्थानों तक फैल चुकी है. यह खबर ऐसे समय सामने अीयी है कि जब हाल ही में चीन के 2 सबसे वरिष्ठ जनरल भी अनुशासनात्मक जांच के घेरे में आए हैं. पिछले कुछ सालों में इसे चीन की सबसे बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है. ऐसे में इस तरह की कार्रवाई का असर जरूर पड़ेगा. इस मामले को लेकर IISS ने यह भी कहा है कि यह प्रभाव अस्थायी हो सकता है और सैन्य आधुनिकीकरण की प्रक्रिया तेज गति से जारी रहने की संभावना है.

रक्षा खर्च बढ़ने के बाद चीन के सामने चुनौतियां

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार PLA वैश्विक स्तर पर सक्रिय है, जैसे अफ्रीका और एशिया में सैन्य सहयोग. दक्षिण चीन सागर में द्वीप निर्माण. इसके साथ ही चीन का रक्षा बजट इस आधुनिकीकरण की रीढ़ है. बता दें कि 2025 में एशिया के कुल रक्षा खर्च में चीन की हिस्सेदारी 44 प्रतिशत पहुंच गई. इतना ही नही बल्कि चीन का आधिकारिक रक्षा बजट 2025 में 7.2 प्रतिशत बढ़कर लगभग 1.67 ट्रिलियन युआन (करीब 230 बिलियन डॉलर) पहुंच गया, लेकिन वास्तविक खर्च इससे अधिक माना जाता है, क्योंकि अनुसंधान और विकास को अलग से फंड किया जाता है. इसे लेकर IISS का कहना है कि रक्षा खर्च बढ़ने के बावजूद चीन  के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं.

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