Washington: अमेरिका और ईरान में तनाव के बीच एक बडा खुलासा हुआ है. ईरान पर पहले इजरायल हमला करेगा फिर अमेरिका युद्ध को समर्थन देगा. यह दावा एक रिपोर्ट में किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार ट्रंप प्रशासन के भीतर कुछ सलाहकार मानते हैं कि अगर इजरायल पहले और अकेले ईरान पर हमला करे और जवाबी कार्रवाई में अमेरिका को निशाना बनाया जाए, तो अमेरिकी जनता सैन्य कार्रवाई के समर्थन में एकजुट हो सकती है.
चला सकते हैं संयुक्त सैन्य अभियान
दावा किया जा रहा है कि अमेरिका और इजरायल संयुक्त सैन्य अभियान भी चला सकते हैं. हालांकि, अभी तक किसी आधिकारिक हमले की घोषणा नहीं हुई है. उधर, अरब सागर में अमेरिकी नौसेना की उन्नत हथियारों के साथ तैनाती ने हालात को और संवेदनशील बना दिया है. रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि यदि बड़े पैमाने पर हमला या रेजीम चेंज जैसी कार्रवाई हुई, तो ईरान पूरे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बना सकता है.
सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे की आशंका
क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी संपत्तियां इजरायल की तरह आयरन डोम जैसी सुरक्षा प्रणाली के तहत नहीं हैं, जिससे अमेरिकी सैनिकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर खतरे की आशंका जताई गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर संभावित जेनेवा वार्ता में शामिल हो सकते हैं.
अभी भी कूटनीतिक समाधान पर जोर
हालांकि प्रशासन का आधिकारिक रुख अभी भी कूटनीतिक समाधान पर जोर देता है लेकिन अन्य विकल्प खुले रखने की बात भी कही गई है. मार्क रूबियो और जे.डी. वेंस ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम पर कड़ा रुख दिखाया. परमाणु समझौते को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच दो दौर की वार्ता हो चुकी है, लेकिन ठोस नतीजा सामने नहीं आया है.
बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने की कोशिश
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्क रूबियो ने आरोप लगाया कि ईरान इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल विकसित करने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि भविष्य की वार्ता में मिसाइल कार्यक्रम भी केंद्रीय मुद्दा होगा. वहीं, उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
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