Beijing: चीन समुद्र के अंदर दुनिया की सबसे लंबी हाईस्पीड रेल टनल बना रहा है. ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक चीन के पूर्वी प्रांत झेजियांग में निंगबो-झोउशान हाई-स्पीड रेलवे का जिंतांग अंडरसी टनल बन रहा है. अब इसमें लगे चीन के इंजीनियरों ने एक बड़ी उपलब्धि भी हासिल कर ली है. ड्रैगन के ट्रेंड कर्मचारियों ने 21 दिनों में ऊंचे पानी के दबाव के बीच इस टनल के अंदर 104 शील्ड कटिंग टूल्स की जांच और बदलाव का काम पूरा कर लिया है.
हाईस्पीड रेल टनल का सबसे कठिन काम
बताया जा रहा है कि यह इस हाईस्पीड रेल टनल का सबसे कठिन काम है. यह उपलब्धि न सिर्फ तकनीकी सफलता है, बल्कि चीन की इंजीनियरिंग क्षमता को भी दुनिया के सामने पेश करती है. रिपोर्ट बताती है कि यह दुनिया की सबसे लंबी अंडरसी हाई-स्पीड रेल टनल के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है. इससे यह भी साबित हो गया कि चीन की खुद से विकसित की गई मजबूत तकनीक ने लंबे समय तक बहुत ज्यादा दबाव वाले असली परीक्षण को सफलतापूर्वक पार कर लिया है.
जिंतांग टनल 16.18 किलोमीटर लंबी
चीन में समुद्र के अंदर बन रही जिंतांग टनल 16.18 किलोमीटर लंबी है. इसमें 11.21 किलोमीटर का शील्ड हिस्सा सबसे महत्वपूर्ण है. यह टनल निंगबो शहर को झोउशान द्वीपों से जोड़ेगी. फिलहाल सड़क या फेरी से यह सफर लगभग डेढ़ से दो घंटे में पूरा होता है लेकिन रेलवे शुरू होने के बाद दोनों शहरों के बीच का सफर सिर्फ 26 मिनट में पूरा हो जाएगा. इससे भी ज्यादा खास बात है कि यह रास्ता समंदर के बीचोंबीच बनी टनल से पूरा होगा.
दोनों किनारों से एक-दूसरे की तरफ खुदाई
फिलहाल इस प्रोजेक्ट में दो सुपर-लार्ज डायमीटर वाली शील्ड मशीनें निंगबो और झोउशान के दोनों किनारों से एक-दूसरे की तरफ खुदाई कर रही हैं. महाद्वीपीय तरफ की योंगझोउ मशीन को 4,940 मीटर की दूरी तय करनी है. इसमें 24 नरम और कठोर चट्टानों की परतें हैं. लगभग 70 प्रतिशत रास्ता इन्हीं परतों से होकर गुजरता है. यहां की चट्टानें बहुत ज्यादा मजबूत हैं. उनकी मजबूती 191 मेगापास्कल तक पहुंचती है. समुद्र तल से 92 मीटर नीचे सबसे गहरे हिस्से में पानी और मिट्टी का दबाव 8.5 गुना तक है.
करीब 60 मीटर की गहराई तक सीमित
लगभग 2,000 मीटर के हिस्से में दबाव 6 गुना से ज्यादा है. इतने ज्यादा दबाव में कटिंग टूल्स बदलना शील्ड टनलिंग का सबसे कठिन काम माना जाता है. पारंपरिक तरीके से हवा के दबाव में काम करने पर एक व्यक्ति सिर्फ 40 मिनट ही काम कर सकता था और वह भी करीब 60 मीटर की गहराई तक सीमित था. इस चुनौती से निपटने के लिए निर्माण टीम ने तीन साल तक गहरे समुद्र की सैचुरेशन डाइविंग तकनीक को अपनाया. उन्होंने शील्ड टनलिंग के लिए चीन का पहला घरेलू सैचुरेशन हाइपरबेरिक सिस्टम बनाया. इसे डीप-सी स्पेस स्टेशन कहा जाता है.
एक बार में आठ घंटे तक काम
इस सिस्टम में रहने, ट्रांसफर और नियंत्रण के मॉड्यूल हैं. ये सभी चीन में ही डिजाइन और बनाए गए हैं. इसमें नौ कर्मचारी लंबे समय तक रह सकते हैं. कर्मचारी ट्रांसफर चैंबर में काम की जगह पहुंचते हैं और एक बार में आठ घंटे तक काम कर सकते हैं. इससे 28 दिनों तक 24 घंटे शिफ्ट में काम संभव हो जाता है. काम खत्म होने के बाद सिर्फ एक बार नियंत्रित तरीके से दबाव कम किया जाता है, जिससे बार-बार दबाव बदलने से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम काफी कम हो जाते हैं. फिलहाल योंगझोउ मशीन 3,936 मीटर तक आगे बढ़ चुकी है. यह उसके काम का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा है जो सफलतापूर्वक पूरा हो गया है.
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