PAK को चीन ने दिया बडा झटका, बलूचिस्तान के माइनिंग प्रोजेक्ट से हटा पीछे, सदमें में शहबाज-मुनीर

Islamabad: पाकिस्तान के खास दोस्त चीन ने उसे गहरा झटका दिया है. पाकिस्तान में जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम-फजल के प्रमुख मौलाना फजलुर रहमान ने दावा किया है कि चीन, पाकिस्तान से खुश नहीं है और बलूचिस्तान में चल रही कुछ खनन परियोजनाओं से पीछे हट रहा है. उन्होंने पाकिस्तान की खनिज संपदा, आर्थिक स्थिति और संप्रभुता को लेकर कई सवाल उठाए हैं. वे पहले भी पाकिस्तान के हालात को लेकर हुकूमत से सवाल उठा चुके हैं और इस बार वो खनिज संसाधनों पर सवाल करते नजर आए.

खनिज संसाधनों का असली फायदा किसे मिल रहा

एक वीडियो में फजलुर रहमान पाकिस्तान के खनिज संसाधनों और खनन परियोजनाओं पर बात करते हुए फजलुर रहमान ने सवाल उठाया कि पाकिस्तान की जमीन में मौजूद खनिज संसाधनों का असली फायदा किसे मिल रहा है. उन्होंने खास तौर पर रेको दिक परियोजना का जिक्र करते हुए पूछा कि वहां खनन कौन कर रहा है और वहां से निकाले जा रहे खनिज आखिर कहां जा रहे हैं.

राजनीतिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल

फजलुर रहमान का कहना है कि पाकिस्तान अपनी विशाल खनिज संपदा का वास्तविक लाभ नहीं उठा पा रहा है. उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि देश के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह हो रहा है और इनसे मिलने वाला फायदा आखिर किसके पास पहुंच रहा है. फजलुर रहमान ने अपने बयान में पाकिस्तान की खनिज संपदा, चीन के साथ संबंधों, आर्थिक निर्भरता, विदेशी संस्थाओं के प्रभाव और राजनीतिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए हैं.

पाकिस्तान में स्थिति खराब 

उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में स्थिति इतनी खराब है कि चीन भी अब बलूचिस्तान की खनन परियोजनाओं से पीछे हटने लगा है, जो दशकों से लटकी हुई हैं. कई बार चीन इसे लेकर पाकिस्तान को वॉर्निंग भी दे चुका है और ग्वादर प्रोजेक्ट में हो रही देरी भी उसे बेचैन कर रही है. JUI-F प्रमुख ने बलूचिस्तान की सैंदक खनन परियोजना के कामकाज की भी आलोचना की. उन्होंने कहा कि कई वर्षों से चल रही इस परियोजना के बावजूद पाकिस्तान को अपेक्षित लाभ नहीं मिला है.

खनिज संपदा को लेकर बहस

हालांकि उन्होंने यह भी माना कि रेको दिक और सैंदक जैसी प्रमुख परियोजनाएं फिलहाल काम कर रही हैं. उनके बयानों के बाद पाकिस्तान में खनिज संपदा को लेकर बहस बढ़ सकती है. फजलुर रहमान ने पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति पर भी चिंता जताई. उन्होंने कहा कि देश अभी भी अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक और दूसरे अंतरराष्ट्रीय कर्जदाताओं पर काफी निर्भर है. उन्होंने यहां तक कहा कि पाकिस्तान में राजनीतिक गुलामी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, बल्कि उसका स्वरूप बदल गया है.

पाकिस्तान में नए प्रांत पर भी राय

पाकिस्तान को कर्जा देने वाली संस्थाएं ही उसकी नीतियों को प्रभावित करती हैं. उन्होंने पाकिस्तान में नए प्रांत बनाने की मांगों पर भी अपनी राय रखी और कहा कि प्रांतों का विभाजन देश की समस्याओं का सीधा समाधान नहीं है.

इसे भी पढ़ें. कानपुर में हादसाः गिरा मकान, मलबे में दबकर पिता और तीन बेटियों की मौत

Latest News

BRICS में पाकिस्तान की बेइज्जती! पहलगाम हमले की निंदा पर खास दोस्त चीन ने भी जताई सहमति

New Delhi: समिट के घोषणा पत्र में पहलगाम हमले की निंदा और आतंकवादी गतिविधियों को समर्थन देने वालों को...

More Articles Like This

Exit mobile version