सऊदी से दोस्ती और हूतियों के साथ सहानुभूति…आखिर क्या है चीन का प्लान

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

China Saudi Arabia: यमन में बसे और ईरान के समर्थन वाले हूती विद्रोही इस समय सऊदी अरब पर ताबड़तोड़ हमले कर रहे हैं. ऐसे में एक रिपोर्ट सामने आई है जो हूतियों से चीन की साठगांठ का खुलासा करती है. दरअसल, इस नई रिपोर्ट से पता चलता है कि हूती विद्रोही चीन से मिले पुर्जों का इस्तेमाल करके अपनी खुद की एडवांस्ड मीडियम-रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें बनाने की कोशिश कर रहे हैं. बता दें कि यह एक ऐसी तकनीकी तरक्की है जिससे सऊदी के लिए ईरान समर्थित इस गुट से पैदा होने वाला खतरा और बढ़ जाएगा.

रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ?

‘कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च’ की रिपोर्ट के अनुसार, हूती विद्रोहियो ने एक चीनी सप्लायर से कई ऐसे पुर्जे मंगवाए हैं जिनकी जरूरत ईरान के सबसे ताकतवर हथियारों में से एक, ‘खेबर शेकन’ का वर्जन बनाने के लिए होती है. यदि हूती ने यह मिसाइल बना ली तो उस मिसाइल की रेंज लगभग 1,200 मील तक होगी, जिसकी जद में पूरा सऊदी अरब और इजरायल आ जाएंगे.

बता दें कि ‘कॉन्फ्लिक्ट आर्मामेंट रिसर्च’ संघर्ष वाले इलाकों में काम करने वाला और हथियारों के इस्तेमाल व उनकी सप्लाई चेन पर रिपोर्ट देने वाला एक ग्रुप है. रिपोर्ट के अनुसार, इसके सीनियर एनालिस्ट फैबियन हिंज ने कहा कि हूती विद्रोहियों के हथियार बनाने के ठिकाने इतनी अच्छी तरह से छिपाए गए हैं कि यह पता लगाना भी मुश्किल है कि प्रोडक्शन कितना आगे बढ़ चुका है. लेकिन शिपिंग डॉक्यूमेंट्स से चीन की एक प्रिसिजन-मेटल बनाने वाली कंपनी की पहचान हुई है, जिसका नाम रिपोर्ट में नहीं बताया गया है.

दो साल से चीन से सॉलिड-फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइलों के पुर्जे मंगा रहे हूती

वहीं, UN की रिपोर्ट और हथियारों के जानकारों द्वारा इकट्ठा किए गए डेटा के मुताबिक, हूती विद्रोहियों के लिए जब्त किए गए सामान का सबसे बड़ा सोर्स अब चीनी कंपनियां हैं. डेटा से पता चलता है कि हूथी विद्रोहियों को ड्रोन के पुर्जे सप्लाई करने वाली ज्यादातर कंपनियां, जिन पर अमेरिका ने बैन लगाया है, वे चीन में स्थित हैं. UN के यमन प्रतिबंध पैनल के पूर्व एक्सपर्ट हेनरी थॉम्पसन ने कहा कि इस बात के सबूत हैं कि हूती विद्रोही करीब दो साल से चीन से सॉलिड-फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइलों के पुर्जे मंगा रहे हैं.

चीन हूतियों की मदद पर क्या कहता है?

चीन का कहना है कि वह हूती विद्रोहियों पर लगे UN के हथियारों के प्रतिबंध का पालन कर रहा है. हालांकि, हूती विद्रोहियों द्वारा मंगाए गए कुछ पुर्जे ‘डुअल-यूज’ यानी दोहरे इस्तेमाल वाले थे. इनका इस्तेमाल आम कामों के लिए भी किया जा सकता है, लेकिन कुछ पुर्जे खास तौर पर मिसाइल के इस्तेमाल के लिए ही बनाए गए थे. वहीं बैलिस्टिक मिसाइलों में चीन के पुर्जों का इस्तेमाल यह दिखाता है कि बीजिंग के पास अपनी डुअल-यूज टेक्नोलॉजी के आखिरी इस्तेमाल को कंट्रोल करने की न तो इच्छाशक्ति है और न ही साधन.

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