Donald Trump: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अपने हेलीकॉप्टर मरीन वन से उड़ान भर रहे थे. तभी उनका हेलीकॉप्टर एक यात्री विमान से टकराने से बच गया. बता दें कि इससे पहले जनवरी 2025 में इसी तरह की गलती के कारण 67 लोगों की जान जा चुकी है. हालांकि उस हादसे के बाद कई नियम भी बनाए गए, लेकिन लगता है कि कोई भी सबक हासिल नहीं किया गया है. फिलहाल पूरे मामले की जांच शुरू हो गई है.
अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने बताया कि मंगलवार को मरीन वन और रीगन वॉशिंगटन नेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भर रहे एक कमर्शियल जेट के बीच कुछ समय के लिए तय न्यूनतम दूरी नहीं रह गई. हालांकि एजेंसी ने साफ किया कि इस दौरान राष्ट्रपति ट्रंप किसी खतरे में नहीं थे और दोनों विमान सुरक्षित अपने-अपने गंतव्य तक पहुंच गए. FAA ने कहा कि शुरुआती सुरक्षा समीक्षा में कुछ समय का ‘लॉस ऑफ सेपरेशन’ पाया गया, जिसके बाद दोनों विमान एक-दूसरे से दूर चले गए.
ट्रंप की सुरक्षा में भी बड़ी चूक?
FAA के नियमों के मुताबिक, एयरपोर्ट के आसपास उड़ रहे दो विमानों के बीच कम से कम 1.5 मील यानी 2.4 किलोमीटर की दूरी और 500 फीट की ऊंचाई की दूरी होना अनिवार्य है. लेकिन इस घटना में यह न्यूनतम दूरी टूट गई. यही वजह है कि अब सिर्फ आम हवाई सुरक्षा ही नहीं, बल्कि राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं.
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप का मरीन वन मंगलवार दोपहर व्हाइट हाउस से करीब 2 बजकर 33 मिनट पर रवाना हुआ. आमतौर पर मरीन वन के उड़ान भरने से कम से कम तीन मिनट पहले एयर ट्रैफिक कंट्रोल को सूचना दी जाती है जिससे रीगन एयरपोर्ट से कमर्शियल उड़ानों को रोक दिया जाए. लेकिन इस बार तय नीति के बावजूद कमर्शियल उड़ानों को नहीं रोका गया. ऐसे में 2 बजकर 34 मिनट पर फ्लोरिडा के पेनसाकोला जा रही Envoy Air 3742 उड़ान भर चुकी थी और उसी दौरान मरीन वन उसके बेहद करीब पहुंच गया. यही वजह है कि अब सवाल तकनीकी खराबी से ज्यादा प्रक्रिया का पालन नहीं होने पर उठ रहे हैं.
अब होगी पूरी जांच
फिलहाल, FAA ने कहा कि घटना की जांच के लिए सुरक्षा टीम बनाई जा रही है. वहीं नेशनल ट्रांसपोर्टेशन सेफ्टी बोर्ड (NTSB) ने भी पूरे मामले की जांच करने का ऐलान किया है. FAA के मुताबिक, घटना के दौरान एयर ट्रैफिक कंट्रोलर लगातार मरीन वन और कमर्शियल विमान दोनों के पायलटों के संपर्क में थे.