अमेरिकी चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा एक्शन, हटाया इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के चारों मेंबर 

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Donald Trump: ईरान से जंग में उलझे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चुनाव से पहले ही अप्रूवल रेंटिग लगातार गिरती जा रही है. महंगाई के साथ जनता की नाराजगी बढ़ रही है, ट्रंप राजनीतिक रूप से काफी परेशान है. ऐसे में अमेरिका में नवंबर में होने जा रहे चुनाव से पहले राष्ट्रपति ट्रंप ने एक बड़ा फैसला लिया है.

अमेरिकी राष्ट्रपति ने चुनाव प्रक्रिया की निगरानी करने वाले एक स्वतंत्र इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के बचे हुए तीनों सदस्यों को भी हटा दिया है. ट्रंप के इस फैसले ने चुनावों में राजनीतिक दखल को लेकर नई बहस छेड़ दी है. इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन एक स्वतंत्र संघीय आयोग है, जो पूरे देश में चुनाव कराने वाले अधिकारियों की मदद करता है, जिसमें चार सदस्य होते है, जिसमे से एक ने पहले ही पद छोड़ दिया था.

ट्रंप का फैसला

ट्रंप ने गुरुवार को इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन के बचे हुए तीनों सदस्यों अलग-अलग तरीके से हटाया. एक रिपब्लिकन सदस्य ने इस्तीफा दे दिया, जबकि दो डेमोक्रेट सदस्यों को व्हाइट हाउस के प्रेसिडेंशियल पर्सनेल ऑफिस की ओर से ईमेल भेजकर नौकरी से हटा दिया गया. रिपोर्ट के अनुसार, इस फैसले की जानकारी रखने वाले दो लोगों ने यह बात बताई. जिन तीन सदस्यों को अब हटाया गया है, उनके नाम थॉमस हिक्स, बेंजामिन होवलैंड और क्रिस्टी मैककॉर्मिक हैं. इन तीनों की नियुक्ति को पहले अमेरिकी सीनेट ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी थी.

यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के हाल के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें राष्ट्रपति को स्वतंत्र सरकारी एजेंसियों के सदस्यों को हटाने की ज्यादा ताकत दी गई थी. साथ ही, नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनाव से पहले डोनाल्ड ट्रंप चुनाव प्रक्रिया में अपनी सरकार की ज्यादा भूमिका चाहते हैं, जबकि आम तौर पर चुनाव करवाने की जिम्मेदारी राज्यों की होती है.

कब हुई थी इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन की स्थापना

इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन की स्थापना 2002 में हेल्प अमेरिका वोट एक्ट के तहत अमेरिकी कांग्रेस ने की थी. आयोग के चारों सदस्यों की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, जिसमें दो डेमोक्रेट और दो रिपब्लिकन सदस्य होना जरूरी होता है. इन नियुक्तियों को अमेरिकी सीनेट की मंजूरी भी चाहिए होती है. 2002 के कानून के मुताबिक राष्ट्रपति नए सदस्यों की नियुक्ति कर सकते हैं. लेकिन अभी यह साफ नहीं है कि डोनाल्ड ट्रंप इस आयोग को आगे कैसे चलाएंगे.

बता दें कि इलेक्शन असिस्टेंस कमीशन अपनी वेबसाइट के अनुसार चुनाव मैनेजमेंट से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराता है, चुनावी मशीनों की जांच करने वाले लैब्स को मान्यता देता है, वोटिंग सिस्टम को मंजूरी देता है और 1993 के राष्ट्रीय मतदाता पंजीकरण कानून के तहत तैयार राष्ट्रीय डाक मतदाता पंजीकरण फॉर्म को भी मैनेज करता है.

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