AC Health Tips: मानसून में रातभर AC चलाकर सोते हैं? हो सकती हैं ये 7 परेशानियां, जानें कितना रखें तापमान

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

AC Health Tips: मानसून की दस्तक के साथ भीषण गर्मी से राहत तो मिल जाती है, लेकिन इस मौसम में बढ़ी हुई उमस और चिपचिपाहट लोगों को परेशान कर देती है. बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ जाती है और कई बार रात में बिना एयर कंडीशनर के सोना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में बहुत से लोग पूरी रात AC चलाकर सोते हैं. AC की ठंडी हवा पसीने और उमस से राहत देती है, लेकिन इसे बहुत कम तापमान पर लंबे समय तक चलाना कुछ लोगों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है.

खासकर गंदे फिल्टर, खराब वेंटिलेशन और सीधे शरीर पर पड़ने वाली ठंडी हवा से नाक-गले में जलन, एलर्जी, त्वचा में रूखापन और मांसपेशियों में अकड़न जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं. शारदा हॉस्पिटल के इंटरनल मेडिसिन डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉक्टर भुमेश त्यागी के मुताबिक, मानसून में AC नमी को कम करने और घर के अंदर की हवा को बेहतर बनाने में मदद करता है. हालांकि, AC की सही देखभाल न होने और पूरी रात बहुत कम तापमान पर इसे चलाने से परेशानी हो सकती है. इसलिए सही तापमान का ध्यान रखना जरूरी है.

मानसून में कितने तापमान पर चलाएं AC?

मानसून के दौरान वातावरण में नमी काफी अधिक होती है. ऐसे में बहुत कम तापमान पर AC चलाने की जरूरत नहीं होती. कमरे को आरामदायक बनाए रखने के लिए AC को 25 से 26 डिग्री सेल्सियस पर चलाया जा सकता है. करीब 2 से 3 घंटे तक इस तापमान पर AC चलाने से कमरे की उमस कम हो सकती है. इसके बाद पंखे की हवा भी अधिक आरामदायक महसूस हो सकती है. रात में सोते समय AC में टाइमर लगाने का विकल्प भी अपनाया जा सकता है, ताकि पूरी रात लगातार ठंडी हवा के संपर्क में न रहना पड़े.

रातभर AC में सोने से हो सकती है नाक और गले में परेशानी

एयर कंडीशनर कमरे की हवा को ठंडा करने के साथ कुछ परिस्थितियों में ड्राईनेस भी बढ़ा सकता है. इससे नाक और गले में जलन, सूखापन या असहजता महसूस हो सकती है. बहुत ठंडी हवा में लंबे समय तक रहने से संवेदनशील लोगों की परेशानी बढ़ सकती है.

गंदे फिल्टर बढ़ा सकते हैं एलर्जी

अगर AC के फिल्टर लंबे समय से साफ नहीं किए गए हैं, तो उनमें धूल और अन्य कण जमा हो सकते हैं. नमी वाले वातावरण में फफूंद की समस्या भी हो सकती है. ऐसे में AC चलाने पर संवेदनशील लोगों में छींक, नाक बंद होना, आंखों में खुजली और खांसी जैसी शिकायतें बढ़ सकती हैं. इसलिए मानसून में AC फिल्टर की नियमित सफाई और समय-समय पर सर्विसिंग जरूरी मानी जाती है.

अस्थमा के मरीजों की बढ़ सकती है परेशानी

बहुत ठंडी हवा कुछ अस्थमा या पुरानी फेफड़ों की बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए परेशानी पैदा कर सकती है. ऐसे लोगों में घरघराहट, खांसी या सांस लेने में असहजता बढ़ सकती है. अगर किसी व्यक्ति को पहले से सांस संबंधी बीमारी है, तो कमरे का तापमान बहुत कम रखने से बचना चाहिए और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए.

आंखों और त्वचा में बढ़ सकता है रूखापन

लंबे समय तक एयर कंडीशनर वाले कमरे में रहने से कुछ लोगों को आंखों में सूखापन महसूस हो सकता है. इसके अलावा त्वचा में रूखापन, जलन और होंठ फटने जैसी परेशानियां भी हो सकती हैं. ऐसी स्थिति में पर्याप्त पानी पीना और सीधे AC की हवा के सामने सोने से बचना मददगार हो सकता है.

साइनस की समस्या हो सकती है ट्रिगर

लगातार ठंडी हवा के संपर्क में रहने से कुछ लोगों को नाक में जकड़न या जलन महसूस हो सकती है. वहीं, अगर AC की सफाई ठीक से न हो और उसमें नमी या फफूंद जमा हो जाए, तो संवेदनशील लोगों में साइनस से जुड़े लक्षण बढ़ सकते हैं.

मांसपेशियों और जोड़ों में हो सकती है अकड़न

पूरी रात AC की तेज ठंडी हवा सीधे शरीर पर पड़ने से सुबह उठने पर कुछ लोगों को गर्दन, कंधे या अन्य मांसपेशियों में अकड़न महसूस हो सकती है. पहले से गठिया या मांसपेशियों से जुड़ी समस्या वाले लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है.

सिरदर्द और थकान की शिकायत

अगर AC वाले कमरे में वेंटिलेशन ठीक न हो और व्यक्ति लंबे समय तक बंद कमरे में रहे, तो कुछ लोगों को सिरदर्द, भारीपन या थकान महसूस हो सकती है. इसलिए कमरे में उचित वेंटिलेशन बनाए रखना भी जरूरी है.

मानसून में AC चलाते समय इन बातों का रखें ध्यान

  • AC का तापमान बहुत कम रखने के बजाय करीब 25-26 डिग्री सेल्सियस पर रखें.
  • पूरी रात लगातार चलाने के बजाय जरूरत के अनुसार टाइमर का इस्तेमाल करें.
  • AC की हवा सीधे चेहरे या शरीर पर न पड़ने दें.
  • फिल्टर की नियमित सफाई करें.
  • कमरे में उचित वेंटिलेशन का ध्यान रखें.
  • अस्थमा, एलर्जी या सांस की बीमारी वाले लोग विशेष सावधानी बरतें.

Disclaimer: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है. किसी भी बीमारी, एलर्जी या सांस संबंधी समस्या में डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.

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