Neck Pain Relief: सुबह उठते ही गर्दन में होता है तेज दर्द? ये 4 योगासन अकड़न से दिला सकते हैं राहत

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Neck Pain Relief: सुबह नींद खुलते ही गर्दन घुमाने में दर्द, कंधों तक खिंचाव और अकड़न महसूस होना कई लोगों की रोज की परेशानी बन जाती है. कई बार रात में गलत पोजीशन में सोना, बहुत ऊंचे या मोटे तकिये का इस्तेमाल और लंबे समय तक गर्दन का एक ही स्थिति में रहना इसकी वजह हो सकता है. परेशानी तब बढ़ जाती है जब सुबह शुरू हुआ दर्द पूरे दिन कंप्यूटर पर काम करने, गाड़ी चलाने और सामान्य गतिविधियों तक को प्रभावित करने लगे.

अगर आपके साथ भी ऐसा अक्सर होता है, तो कुछ हल्के योग अभ्यास गर्दन और कंधों की जकड़न कम करने में मदद कर सकते हैं. ये अभ्यास मांसपेशियों की गतिशीलता और लचीलेपन पर काम करते हैं. हालांकि तेज दर्द, चोट, हाथ में झनझनाहट या कमजोरी जैसी स्थिति में जबरदस्ती योग करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है. आइए जानते हैं गर्दन की अकड़न में कौन से 4 योग अभ्यास मददगार हो सकते हैं.

1. मार्जरीआसन

मार्जरीआसन रीढ़, ऊपरी पीठ और गर्दन के आसपास की मांसपेशियों में हल्का खिंचाव देने वाला अभ्यास है. इसे करने के लिए सबसे पहले दोनों हाथों और घुटनों के बल जमीन पर आ जाएं. हथेलियों को कंधों के नीचे और घुटनों को कूल्हों के नीचे रखें. अब सांस लेते हुए पीठ को सहज रूप से नीचे की ओर ले जाएं और सिर को हल्का ऊपर उठाएं. इसके बाद सांस छोड़ते हुए पीठ को गोल करें और ठुड्डी को धीरे से छाती की ओर लाएं. इस प्रक्रिया को आराम से दोहराएं. गर्दन को झटका देने या जरूरत से ज्यादा पीछे मोड़ने से बचें.

2. बालासन

तनाव और थकान कम करने के लिए बालासन एक आरामदायक योग मुद्रा मानी जाती है. यह पीठ और कंधों को रिलैक्स करने में मदद कर सकती है. इसे करने के लिए घुटनों के बल बैठें और कूल्हों को एड़ियों की ओर ले जाएं. अब धीरे-धीरे आगे की ओर झुकें और माथे को जमीन या किसी सहारे पर टिकाएं. हाथों को आगे की ओर फैलाया जा सकता है या शरीर के पास रखा जा सकता है. इस दौरान सांस सामान्य रखें और शरीर को जबरदस्ती नीचे न दबाएं.

3. भुजंगासन

भुजंगासन ऊपरी शरीर, छाती और पीठ की मांसपेशियों पर काम करता है. लंबे समय तक झुककर बैठने वाले लोगों के लिए यह पोस्चर से जुड़ी जकड़न में उपयोगी हो सकता है, लेकिन इसे सही तकनीक से करना जरूरी है. सबसे पहले पेट के बल लेट जाएं और दोनों हथेलियों को कंधों के पास रखें. अब सांस लेते हुए छाती को धीरे-धीरे ऊपर उठाएं. कोहनियों को हल्का मुड़ा रहने दें और कंधों को कानों से दूर रखें. गर्दन को बहुत पीछे न फेंकें, बल्कि सहज स्थिति में रखें. कुछ सेकंड रुकने के बाद धीरे-धीरे वापस नीचे आएं.

4. ग्रीवा संचालन

अगर सुबह समय कम है, तो हल्का ग्रीवा संचालन बैठकर किया जा सकता है. आरामदायक स्थिति में सीधे बैठें और गर्दन को धीरे-धीरे दाएं-बाएं मोड़ें. इसके बाद सिर को नियंत्रित तरीके से ऊपर-नीचे ले जाएं. एक जरूरी बात यह है कि तेज गर्दन दर्द, चक्कर, सर्वाइकल समस्या या नस से जुड़ी परेशानी होने पर गर्दन को पूरा गोल-गोल घुमाना हर व्यक्ति के लिए उचित नहीं हो सकता. ऐसे में केवल दर्द-रहित सीमा तक हल्की गतिविधि करें और जरूरत पड़ने पर फिजियोथेरेपिस्ट या डॉक्टर की सलाह लें.

सुबह गर्दन दर्द होने पर इन बातों का भी रखें ध्यान

योग के साथ सोने की मुद्रा और तकिये पर ध्यान देना भी जरूरी है. बहुत ऊंचा या बहुत मोटा तकिया गर्दन को असहज स्थिति में रख सकता है. पेट के बल सोने से भी कुछ लोगों में गर्दन पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है. अगर आप लंबे समय तक कंप्यूटर या मोबाइल का इस्तेमाल करते हैं, तो स्क्रीन की ऊंचाई और बैठने की मुद्रा पर ध्यान दें. लगातार एक ही स्थिति में रहने के बजाय बीच-बीच में हल्का मूवमेंट करना भी उपयोगी हो सकता है.

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

अगर गर्दन का दर्द लगातार बना रहता है, बार-बार लौटता है या तेजी से बढ़ रहा है, तो इसे केवल गलत सोने की मुद्रा मानकर नजरअंदाज न करें. खासकर दर्द के साथ हाथ में सुन्नपन, झनझनाहट, कमजोरी, तेज सिरदर्द, चक्कर, बुखार या हाल की चोट हो तो चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है.

अस्वीकरण: यह जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से दी गई है. योग किसी बीमारी के इलाज का विकल्प नहीं है. किसी भी नए योग अभ्यास को शुरू करने से पहले, विशेष रूप से गंभीर गर्दन दर्द, सर्वाइकल समस्या, चोट या अन्य बीमारी की स्थिति में, योग्य डॉक्टर या प्रशिक्षित योग विशेषज्ञ की सलाह लें.

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