कन्हैया को अपना मानने वाले भक्त से प्रसन्न होते हैं भगवान- दिव्य मोरारी बापू

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

पुष्‍कर/राजस्‍थान: परम पूज्‍य संत श्री दिव्‍य मोरारी बापू ने कहा, जिन्होंने गिरिराज को धारण किया, उनका नाम
गिरिराजधरण है, गोवर्धनधारी है, वो गिरधारी है। भागवत में लिखा है कि जैसे जमीन में बरसात के दिनों में गोल-गोल छाते निकल आते हैं और उन्हें कोई बच्चा उठा ले, इस तरह कन्हैया ने सात कोस का पहाड़ उठा लिया। बृजवासियों को डर भी लगा कि कहीं गिर गया तो मर न जायें। उन्होंने सोचा कि यदि मरना ही है, बाहर मरने की जगह अन्दर कन्हैया के सामने मरें। यशोदा ने देखा कि पहाड़ उठ गया और कन्हैया की अंगुली लगी है, यशोदा को अभी भी विश्वास नहीं हो रहा था।

वह कहती हैं अरे बृजवासियों तुम भी लाठियां लगा लो, इन्हें हटाना नहीं,देखना, मेरे लाला को कुछ खतरा न हो जाये। हजारों लाठियां चारों तरफ लग गईं। ग्वाल बाल ताल ठोंककर कहते हैं, मैया, तू चिन्ता मतकर, जब तक हम जिन्दा हैं, तेरे लाला को कुछ नहीं होगा। कन्हैया हमारे प्राण हैं, हम अपने प्राण दे देंगे, कन्हैया को कुछ नहीं होगा। ईश्वर ऐसी बातें सुनकर बड़ा खुश होता है। जब कोई कहता है, कन्हैया मेरा है, कन्हैया मेरे प्राण हैं, मैं इसके लिए सब कुछ कर सकता हूं। अब मैया एक-एक के पास जा रही है, देखो लाठी मत हटाना, मेरा लाल बड़ा सुकुमार है, छोटा- सा ७ वर्ष का है।

भगवान ने सुदर्शन चक्र को बुलाकर चारों तरफ रक्षा के लिए लगा दिया, वासुकी नाग को बुलाकर मेंड बना दिया, ताकि अन्दर पानी न जाये। अगस्त्य ऋषि को पानी पीने के लिए बुला लिया। तीन दिन और तीन रात बीत गये, अखण्ड वर्षा, नीचे बृजवासी दिवाली मना रहे हैं। उधर इन्द्र ने पूंछा क्या हाल है बृजवासियों का। उन्होंने बताया- वहां दिवाली मनाई जा रही है। ऐसा लगता है कि वहां कुछ हुआ ही नहीं। इन्द्र ने उठाया वज्र और खींचकर मारा। इन्द्र के वज्र में बड़ी शक्ति है, पर्वत का पाउडर बन जाता है उससे। देवताओं ने कहा वज्र गया, अब वापिस नहीं आयेगा, अब जाकर देखो क्या हाल है?

मन्त्री लौटकर बताया कि तुम्हारे वज्र से एक कीड़ी भी नहीं मरी।अब इन्द्र का दिमाग ठिकाने आ गया। सभी हरि भक्तों को पुष्कर आश्रम एवं गोवर्धनधाम आश्रम से साधु संतों की शुभ मंगल कामना।

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