DRC Ebola Outbreak: अफ्रीकी देश डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो (DRC) में इबोला वायरस का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है. स्वास्थ्य अधिकारियों के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में इबोला संक्रमण के कुल मामलों की संख्या बढ़कर 550 हो गई है, जबकि अब तक 101 लोगों की मौत हो चुकी है. बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि बीमारी का प्रसार अभी भी तेजी से जारी है और स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. सोमवार को जारी आधिकारिक अपडेट के मुताबिक, रविवार को पूर्वी प्रांतों इतुरी और नॉर्थ किवु में 35 नए मामले सामने आए, जिनमें 10 लोगों की मौत दर्ज की गई. हालांकि इस दौरान सात मरीज स्वस्थ भी हुए हैं, जिसके बाद इबोला से ठीक होने वाले लोगों की कुल संख्या 19 पहुंच गई है.
हर सप्ताह बढ़ रहा संक्रमण
स्वास्थ्य अधिकारियों ने कहा कि इबोला संक्रमण का दायरा लगातार बढ़ रहा है और हर सप्ताह नए मामलों में इजाफा देखा जा रहा है. हाल के दिनों में आंकड़ों में जो मामूली गिरावट दिखाई दी थी, वह संक्रमण कम होने का संकेत नहीं है. अधिकारियों के अनुसार यह गिरावट केवल प्रयोगशालाओं से रिपोर्ट मिलने में हुई देरी की वजह से दिखाई दी है. रविवार तक कुल 309 लोग अस्पतालों और आइसोलेशन केंद्रों में भर्ती थे. इनमें 116 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 193 लोगों को संदिग्ध श्रेणी में रखा गया है और उनकी निगरानी की जा रही है.
कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग में चुनौतियां
महामारी को नियंत्रित करने के लिए संक्रमित लोगों के संपर्क में आए व्यक्तियों की पहचान और निगरानी बेहद जरूरी होती है. प्रभावित तीन प्रांतों में कॉन्टैक्ट फॉलो-अप दर बढ़कर 64.4 प्रतिशत तक पहुंची है, लेकिन यह अभी भी निर्धारित 95 प्रतिशत लक्ष्य से काफी कम है. स्वास्थ्य विभाग के अनुसार 5,418 लोगों को कॉन्टैक्ट फॉलो-अप सूची में शामिल किया गया था, जिनमें से केवल 3,489 लोगों की जांच और निगरानी की जा सकी. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की गति नहीं बढ़ाई गई तो संक्रमण और तेजी से फैल सकता है.
लैब संसाधनों पर बढ़ा दबाव
नॉर्थ किवु प्रांत में प्रयोगशालाओं की क्षमता पर भी भारी दबाव बना हुआ है. रिएजेंट की कमी के कारण 183 नमूनों की जांच रिपोर्ट अभी तक लंबित है. इससे नए मामलों की पहचान और संक्रमित मरीजों के उपचार में देरी हो रही है.
15 मई को हुई थी प्रकोप की घोषणा
डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्रालय ने इबोला वायरस के बुंडिबुग्यो (Bundibugyo) स्ट्रेन से फैले इस नए प्रकोप की आधिकारिक घोषणा 15 मई को की थी. हालांकि यह स्ट्रेन इबोला के जैरे वैरिएंट की तुलना में कम पाया जाता है, लेकिन यह भी गंभीर संक्रमण और मौत का कारण बन सकता है.
विस्थापन और पलायन बढ़ा रहे खतरा
समाचार एजेंसी शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, संक्रमण से प्रभावित इतुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों की कुल आबादी करीब 1.5 करोड़ है. इन क्षेत्रों में लंबे समय से संघर्ष और अस्थिरता के कारण बड़ी संख्या में लोग आंतरिक रूप से विस्थापित हो रहे हैं और पड़ोसी देशों की ओर पलायन कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों की लगातार आवाजाही के कारण वायरस के अन्य क्षेत्रों और देशों में फैलने का खतरा भी बढ़ गया है.
क्या है इबोला वायरस?
इबोला एक बेहद खतरनाक और जानलेवा वायरल बीमारी है, जो ऑर्थोइबोलावायरस के कारण होती है. यह वायरस फिलोविरिडे परिवार का हिस्सा है और इंसानों के साथ-साथ अन्य प्राइमेट्स को भी संक्रमित कर सकता है. इस बीमारी की पहली पहचान वर्ष 1976 में तत्कालीन जैरे (अब डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो) और सूडान (अब दक्षिण सूडान) में लगभग एक साथ फैले संक्रमण के दौरान हुई थी. इबोला संक्रमित व्यक्ति के शरीर के तरल पदार्थों के संपर्क में आने से फैलता है और समय पर इलाज न मिलने पर इसकी मृत्यु दर काफी अधिक हो सकती है.
स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं स्वास्थ्य अधिकारी
स्वास्थ्य विभाग और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार हालात पर नजर बनाए हुए हैं. संक्रमण की बढ़ती रफ्तार और सीमित संसाधनों को देखते हुए विशेषज्ञों ने लोगों से सतर्क रहने और स्वास्थ्य दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है. यदि संक्रमण की रफ्तार इसी तरह बनी रही तो आने वाले दिनों में मामलों और मौतों की संख्या में और वृद्धि हो सकती है.
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