El Nino wmo Prediction: दुनिया भर के मौसम और भारत में आने वाले मॉनसून को लेकर बड़ी खबर सामने आई है. विश्व मौसम संगठन (WMO) ने अपनी चेतावनी में कहा है कि इस साल जून और अगस्त के बीच अल नीनो बनने की संभावना 80% फीसदी है, जो अल नीनो के बारे में पिछले आकलन में बदलाव को दिखाती है.
बता दें कि हाल ही में अमेरिका के क्लाइमेट पूर्वानुमान केंद्र ने भी अल नीनो के अनुमान को बढ़ाकर 82% कर दिया था. वहीं, इसके पहले अप्रैल में यह 65 फीसदी रखा गया था. इन बदलावो से पता चलती हैं कि प्रशांत महासागर में होने वाली घटना के चलते शुरू हुआ वायुमंडलीय बदलाव तेजी से हो रहा है.
क्या है अल नीनो?
अल नीनो उस घटना को कहते है, जिसमें मध्य और पूर्वी प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का जल अपने लंबे समय के औसत से गर्म हो जाता है. आम तौर पर 9 से 12 महीने तक चलने वाला यह सिस्टम दुनिया भर के तापमान और बारिश के पैटर्न को बुरी तरह प्रभावित करता है. इससे मौसम में बदलाव का खतरा बढ़ता है.
अल नीनो का भारत पर असर
आपको बता दें कि अल नीनो की घटना दक्षिण एशिया में मॉनसून को कमजोर करती है. अर्थात इस बार भारत में मॉनसून कमजोर हो सकता है, जिसके चलते ज्यादा तेज गर्मी का सामना करना पड़ेगा. विश्व मौसम विज्ञान संगठन के अपडेट में कहा गया है कि जो अल नीनो अभी बन रहा है, वह मध्यम दर्जे का होगा और काफी मजबूत भी हो सकता है. यह भारत के लिए मुश्किल बढ़ाने वाला होगा, क्योंकि भारत पहले से ही कमजोर मॉनसून का सामना कर रहा है.

