France Student Protest: फ्रांस में शिक्षा व्यवस्था को लेकर शुरू हुआ छात्रों का आंदोलन अब देशभर में फैल चुका है. हजारों छात्र सड़कों पर उतर रहे हैं और कई जगह पुलिस के साथ उनकी झड़प भी हुई है. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े हैं. आंदोलन के दौरान कई जगह हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आई हैं. लेंस शहर में एक स्कूल के पास हुए धमाके में 15 साल के एक छात्र का हाथ उड़ गया, जिसके बाद उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया.
आंसू गैस का गोला लगने की खबर
इससे पहले 14 साल के ईडन नाम के एक छात्र के सिर पर आंसू गैस का गोला लगने की खबर सामने आई थी. उसके जबड़े में दो जगह फ्रैक्चर हुआ और उसे बड़ी सर्जरी से गुजरना पड़ा. प्रदर्शन के दौरान अब तक 190 छात्रों के घायल होने और 5,060 लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी सामने आई है. गिरफ्तार लोगों में 87 प्रतिशत नाबालिग बताए गए हैं. ऐसे में यह आंदोलन अब राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों की सरकार के लिए भी बड़ी चुनौती बन गया है.
स्कूलों के लिए ज्यादा फंडिंग की मांग
फ्रांस में छात्रों का यह आंदोलन शिक्षा व्यवस्था में सुधार और स्कूलों के लिए ज्यादा फंडिंग की मांग को लेकर शुरू हुआ है. छात्रों का कहना है कि स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन उनके मुकाबले कक्षाएं, शिक्षक और दूसरी जरूरी सुविधाएं उसी अनुपात में नहीं बढ़ाई गई हैं. कई स्कूलों में छात्रों की बढ़ती संख्या के कारण भीड़ बढ़ रही है. इसके साथ ही शिक्षकों की कमी और स्कूलों की खराब स्थिति भी छात्रों और शिक्षा कर्मचारियों के लिए बड़ी समस्या बन रही है.
संसाधनों की कमी दूर करने की मांग
इसी वजह से छात्र सरकार से शिक्षा के लिए ज्यादा फंडिंग और स्कूलों में स्टाफ तथा संसाधनों की कमी दूर करने की मांग कर रहे हैं. उत्तरी शहर लिले में प्रदर्शन के दौरान एक प्रदर्शनकारी ने मीडिया से कहा कि हमें उन्हें सुनना चाहिए. यह बात इस आंदोलन की मुख्य मांग को भी सामने रखती है कि सरकार छात्रों और शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं को गंभीरता से सुने.
संसाधनों की कमी के खिलाफ विरोध
इस आंदोलन की शुरुआत 21 सितंबर को पेरिस के एक स्कूल से हुई थी. वहां छात्रों ने स्कूल में स्टाफ और संसाधनों की कमी के खिलाफ विरोध शुरू किया था. बाद में स्कूल में अतिरिक्त स्टाफ भेजे जाने के बाद वहां की हड़ताल खत्म हो गई, लेकिन तब तक विरोध दूसरे इलाकों में भी फैल चुका था. इसके बाद अलग-अलग शहरों के स्कूलों में प्रदर्शन शुरू हुए और विश्वविद्यालयों के छात्र भी इस आंदोलन से जुड़ गए.
इसे भी पढ़ें. प्रशासनिक जीवन के 25 साल पूरे: PM मोदी बोले- आज मैं जो कुछ भी हूं, उसमें सबसे बड़ा योगदान जनता का