डोनाल्ड ट्रंप के बाद NATO चीफ पर भड़कीं मेलोनी, ईरान को दी सफाई

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Giorgia Meloni: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के नोकझोक के बाद अब इटली ने ईरान को फोन मिलाया कर सफाई दी है. बता दें कि फोन मिलाने के पीछे की वहज NATO के सेक्रेटरी-जनरल मार्क रुटे का एक बयान है. दरअसल NATO के सेक्रेटरी-जनरल ने कहा है कि ईरान पर हमलों के दौरान मेलोनी सरकार ने इटली में मौजूद अमेरिकी बेस से अमेरिकी सैन्य विमानों को उड़ान भरने की इजाजत दी थी. नाटो चीफ के इस बयान के बाद इटली में राजनीतिक विरोध शुरू हो गया, जिसके बाद खुद मेलोनी को सफाई देनी पड़ी है.

नाटो चीफ ने क्या कहा?

यह विवाद उस वक्त शुरू हुआ जब नाटो के सेक्रेटरी-जनरल ने कहा कि रोम ने जंग के दौरान इटली में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों से 500 अमेरिकी सैन्य विमानों को उड़ान भरने की अनुमति दी. इस बयान के बाद से ही इटली में राजनीतिक विवाद शुरू हो गया. वहीं, मार्क रुट्टे ने यह भी कहा कि “एक-एक करके कई देशों और सहयोगी देशों ने अपने सैन्य अड्डे उपलब्ध कराए. इसका मतलब है कि यूरोप के सैन्य अड्डों से 4,000 से 5,000 के बीच विमान उड़ान भरकर एपिक फ्यूरी में मदद के लिए गए”

मार्क रुट्टे के इस बयान के बाद इटली की सरकार घिर गई. दरअसल, मेलॉनी की सरकार खुद को ईरान पर हमले से अलग दिखा रही थी. उसने कहा था कि इटली में मौजूद अमेरिकी सैन्य अड्डों से केवल वही विमान मिडिल ईस्ट जा सकेंगे जो अमेरिका और इटली के बीच हुए समझौते के तहत लॉजिस्टिक (सामान पहुंचाने) और तकनीकी सहायता से जुड़े हों.

मेलोनी ने दी सफाई

इटली की पीएम मेलोनी ने मार्क रुटे पर ईरान के खिलाफ हमलों में उनके देश की ओर से अमेरिका को भारी समर्थन दिए जाने के बारे में उलझा हुआ बयान देने का आरोप लगाया. रिपोर्ट के अनुसार मेलोनी ने कहा कि नाटो चीफ अमेरिका को यह यकीन दिलाने में जल्दबाजी कर रहे हैं कि NATO अहम भूमिका निभा रहा है. इसी चक्कर में रुटे गलत तरीके से यह संकेत दे रहे थे कि ईरान पर सीधे हमलों के लिए इटली से उड़ानें भरी गई थीं.

मेलोनी ने कहा कि “आपके बयान को हम उत्साह में दिया बयान कह सकते हैं. इसमें सेक्रेटरी-जनरल ने ऐसी चीजों को एक साथ मिला दिया है जो असल में एक-दूसरे से काफी अलग हैं, और उन्होंने ऑथोराइज की गईं उड़ानों के प्रकारों को लेकर भ्रम पैदा किया है.” मेलोनी ने साफ-साफ कहा कि “हमने ईरान के साथ हुए संघर्ष में हिस्सा नहीं लिया. वैसे, यदि हमने ईरान संघर्ष में हिस्सा लिया होता, तो उस निराशा का कोई कारण नहीं होता जिसका जिक्र अमेरिकी राष्ट्रपति बार-बार करते रहते हैं.”

इटली के विदेश मंत्री ने ईरान को भी मिलाया फोन

मेलोनी की सफाई काफी नहीं थी. इटली के विदेश मंत्री अंतोनियो तायानी ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से फोन पर बात की. उन्होंने साफ कहा कि इटली ने कभी भी किसी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लिया और न ही ईरान के खिलाफ जंग के लिए अपने सैन्य बेस के इस्तेमाल की अनुमति दी.

अंतोनियो तायानी ने एक्स पर लिखा कि “मैंने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से बात की. अमेरिका के साथ हुए समझौतों का पूरी तरह पालन करते हुए, इटली ने कभी किसी सैन्य अभियान में हिस्सा नहीं लिया और न ही ईरान के खिलाफ युद्ध के लिए अपने सैन्य अड्डों के इस्तेमाल की अनुमति दी. मैंने हॉर्मुज को पूरी तरह खोलने का अनुरोध किया, जिससे वहां फंसे इटली के सभी मालवाहक जहाज गुजर सकें. तेहरान में इटली के दूतावास का फिर से खुलना बातचीत का एक मजबूत संकेत है. इससे आर्थिक और सांस्कृतिक संबंध फिर से शुरू करने में भी मदद मिलेगी.”

बता दें कि इटली की तरफ से ईरान को सबूत भी दिया गया. इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेत्तो ने भी कहा कि अमेरिका के एपिक फ्यूरी सैन्य अभियान के दौरान सिगोनेला और अवियानो सैन्य अड्डों (दोनों इटली में हैं) से गुजरने वाली फ्लाइटों की संख्या 2019 से 2025 के किसी भी साल की तुलना में काफी कम थी.
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