Washington: वेनेजुएला के बाद से ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नजर ग्रीनलैंड पर है. इसी बीचट्रंप की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने ग्रीनलैंड में नया विवाद खड़ा कर दिया है. ट्रंप ने ग्रीनलैंड की राजधानी नुक की तस्वीर के साथ लिखा, “हैलो, ग्रीनलैंड!” इसके बाद वहां अमेरिका की बढ़ती मौजूदगी को लेकर लोगों का गुस्सा और बढ़ गया. इसकी दुनियाभर में चर्चा होने लगी.
वाणिज्य दूतावास को लेकर बड़े प्रदर्शन
ग्रीनलैंड की राजधानी नुक में हाल ही में अमेरिका के नए वाणिज्य दूतावास को लेकर बड़े प्रदर्शन हुए. सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए और अमेरिका विरोधी नारे लगाए. प्रदर्शनकारियों ने पोस्टर उठाए हुए थे, जिन पर लिखा था, “हमें आपका पैसा नहीं चाहिए” और “Go Away” यानी “यहां से चले जाओ.” ग्रीनलैंड के लोगों का कहना है कि अमेरिका वहां जरूरत से ज्यादा दखल देने की कोशिश कर रहा है.
ग्रीनलैंड में नेताओं और कारोबारियों से मुलाकात
ग्रीनलैंड में बढ़ते विरोध से साफ है कि वहां के कई लोग अमेरिका की सक्रियता को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप मान रहे हैं. कई लोगों को डर है कि अमेरिका आर्कटिक क्षेत्र में अपना प्रभाव बढ़ाने के लिए ग्रीनलैंड का इस्तेमाल करना चाहता है. अमेरिका के विशेष दूत Jeff Landry ने ग्रीनलैंड में नेताओं और कारोबारियों से मुलाकात की. उन्होंने कहा कि अमेरिका और ग्रीनलैंड सुरक्षा, ऊर्जा और आर्थिक विकास पर साथ काम करना चाहते हैं. जेफ लैंड्री ने दावा किया कि ग्रीनलैंड भविष्य में बड़ा तेल उत्पादक बन सकता है.
दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव
उनके अनुसार यहां से रोज करीब 20 लाख बैरल तेल निकाला जा सकता है. उनका कहना था कि अगर ऐसा हुआ तो दुनिया की ऊर्जा सप्लाई पर दबाव कम होगा और होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता भी घट सकती है. डोनाल्ड ट्रंप पहले भी ग्रीनलैंड को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण बता चुके हैं. उनका मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका की मजबूत मौजूदगी भविष्य की सुरक्षा और ऊर्जा जरूरतों के लिए जरूरी है.
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