Greenland: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को हासिल करने की कोशिश अब दिलचस्प होती जा रही है और इसमें अब ब्रिटेन की भी एंट्री हो गई है. दरअसल, ब्रिटेन नाटो सहयोगियों के साथ इस बात पर चर्चा कर रहा है कि रूस और चीन से उत्पन्न खतरों का मुकाबला करने के लिए आर्कटिक में सुरक्षा को मजबूत करने में वह कैसे मदद कर सकता है. हालांकि परिवहन सचिव हेइडी अलेक्जेंडर का कहना है कि ये बातचीत सामान्य कामकाज के तौर पर हुई है, न कि ट्रंप द्वारा ग्रीनलैंड पर कब्जा करने की हालिया धमकियों के जवाब में.
डोनालड ट्रंप ने कहा कि वह नाटो सहयोगी डेनमार्क के ग्रीनलैंड को हासिल करने के लिए समझौता करना चाहेंगे, ताकि रूस या चीन इसे अपने कब्जे में न ले सकें. उन्होंने कहा था कि ग्रीनलैंड पर हम कुछ न कुछ करेंगे, चाहे उन्हें पसंद हो या न हो.
डेनमार्क करता है ग्रीनलैंड की सुरक्षा
बता दें कि ग्रीनलैंड की सुरक्षा डेनमार्क करता है. 57,000 की आबादी वाले द्वीप की सेना अमेरिका की तुलना में बहुत छोटी है. इस द्वीप पर अमेरिका का एक सैन्य अड्डा है. ऐसे में डेनमार्क के प्रधानमंत्री ने चेतावनी दी है कि ग्रीनलैंड पर कब्जा नाटो के लिए खतरा बन जाएगा. दरअसल, ट्रंप प्रशासन द्वारा ग्रीनलैंड के खिलाफ अपनी चेतावनियों को दोहराने के बाद से अमेरिका और डेनमार्क के बीच तनाव बढ़ गया है.
अमेरिका में डेनमार्क के राजदूत जेस्पर मोलर सोरेनसेन ने नव नियुक्त अमेरिकी ग्रीनलैंड दूत जेफ लैंड्री पर पलटवार किया. दरअसल, लैंड्री ने कहा था कि द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जब डेनमार्क ग्रीनलैंड की संप्रभुता की रक्षा नहीं कर सका, तब अमेरिका ने उसकी रक्षा की. इसके जवाब में सोरेनसेन ने कहा कि डेनमार्क सदैव अमेरिका के साथ खड़ा रहा है, विशेष रूप से 11 सितंबर, 2001 के हमलों के बाद, और ग्रीनलैंड के लोगों को ही अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार है. उन्होंने आगे कहा कि आइए, साझेदार और सहयोगी के रूप में आर्कटिक में सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना जारी रखें.
ब्रिटेन ट्रंप से सहमत
वहीं, परिवहन सचिव हेइडी अलेक्जेंडर ने कहा कि ब्रिटेन ट्रंप से सहमत है कि रूस और चीन आर्कटिक सर्कल में तेजी से अधिक प्रतिस्पर्धी बन रहे हैं. हालांकि हमने दुनिया के उस हिस्से में यूक्रेन जैसे भयावह परिणाम नहीं देखे हैं, लेकिन यह वास्तव में महत्वपूर्ण है कि हम अपने सभी नाटो सहयोगियों के साथ मिलकर यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास करें कि हमारे पास (रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर) पुतिन के खिलाफ दुनिया के उस हिस्से में एक प्रभावी निवारक मौजूद हो.
सभी को स्वीकार करना होगा वास्तविक्ता
इसके अलावा, ब्रिटेन के पूर्व अमेरिकी राजदूत पीटर मैंडेलसन ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि ट्रंप बलपूर्वक ग्रीनलैंड पर कब्जा करेंगे. वह मूर्ख नहीं हैं. हम सभी को इस वास्तविकता को स्वीकार करना होगा कि आर्कटिक को चीन और रूस से सुरक्षित करने की आवश्यकता है. और अगर आप मुझसे पूछें कि इस सुरक्षा प्रयास का नेतृत्व कौन करेगा, तो हम सभी जानते हैं, है ना, कि यह अमेरिका ही होगा. लिबरल डेमोक्रेट पार्टी के नेता एड डेवी ने सुझाव दिया कि ब्रिटेन डेनमार्क के साथ संयुक्त कमान में ग्रीनलैंड में सेना तैनात करने की पेशकश करे.
इसे भी पढें:-China Railway 2025 Report: 4.58 अरब यात्रियों के साथ चीन बना दुनिया का सबसे बड़ा रेल नेटवर्क