यूरोपीय देशों में इस बार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी से मचा हाहाकार, लंदन से फ्रांस तक फैला Heat Dome Temperature का प्रकोप

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Europe Heat Dome Temperature News: यूरोपीय देशों में इस बार रिकॉर्ड तोड़ गर्मी के साथ ही भीषण लू और हीटवेव से हाहाकार मचा हुआ है. ब्रिटेन, फ्रांस, स्पेन, इटली और जर्मनी जैसे जिन देशों को ठंडा-ठंडा कूल-कूल कहा जाता है, वो भी इस समय भीषण गर्मी की चपेट में हैं. स्थिति यह है कि जो तापमान जुलाई या अगस्त के महीनों में देखा जाता था, वो मई के आखिरी हफ्ते में ही रिकॉर्ड दर्ज किया जा रहा है. मौसम वैज्ञानिकों ने इसको असामान्य और चिंताजनक करार दिया है.

तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने की चेतावनी

लंदन के प्रसिद्ध क्यू गार्डन्स में तापमान 35.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है, जिसने ब्रिटेन के इतिहास में मई महीने के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं. फ्रांस के दक्षिण-पश्चिमी हिस्सों में पारा 36 डिग्री सेल्सियस से 37.1 डिग्री तक को पार कर चुका है, जबकि स्पेन के कई हिस्सों में इस हफ्ते तापमान 40 डिग्री तक पहुंचने की चेतावनी जारी की गई है. इस भीषण गर्मी के कारण फ्रांस और ब्रिटेन में कई लोगों की मौत की खबरें भी सामने आई हैं.

सबसे बड़ा तात्कालिक कारण हीट डोम

इस बार यूरोप में आई समय से पहले और तेज हीटवेव का सबसे बड़ा तात्कालिक कारण हीट डोम ही है, जो कि एक वायुमंडलीय घटना है. अहम सवाल है कि यह कैसे काम करता है? जब वायुमंडल में अधिक दबाव का मजबूत क्षेत्र बन जाता है, तो वह गर्म हवा को एक जगह पर रोक लेता है. यह बिल्कुल किसी पतीले पर रखे ढक्कन की तरह काम करता है. उत्तर अफ्रीका के सहारा रेगिस्तान से उठी अत्यधिक गर्म हवाएं जब यूरोप के ऊपर पहुंचीं, तो इस उच्च दबाव वाले क्षेत्र ने उन्हें वहीं पर कैद कर लिया.

साफ तौर पर ‘क्लाइमेट चेंज’ के फिंगरप्रिंट्स

अब ऐसे में होता यह है कि दबाव, गर्म हवा को नीचे की ओर धकेलता है, जिससे हवा और भी ज्यादा संकुचित होकर गर्म हो जाती है. इसके कारण आसमान साफ रहता है और तेज धूप सीधे जमीन को तपाती है. वैज्ञानिकों का इस बारे में साफ कहना है कि भीषण गर्मी पर साफ तौर पर ‘क्लाइमेट चेंज’ के फिंगरप्रिंट्स हैं. क्लाइमेट साइंटिस्ट के अनुसार ब्रिटेन और यूरोप में स्प्रिंग सीजन यानी वसंत के मौसम में 35 डिग्री सेल्सियस तापमान देखना हैरान करने वाला है.

धरती का औसत तापमान भी बढ़ा

क्लाइमेट चेंज की वजह से अब ये हीटवेव ना केवल ज्यादा गर्म और लंबी हो गई हैं, बल्कि अब ये समय से बहुत पहले ही दस्तक देने लगी हैं. ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्रीनहाउस गैसें लगातार बढ़ रही हैं, जिससे धरती का औसत तापमान भी बढ़ा है. इसका असर यूरोप पर पड़ा है, जो इस समय दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है, जिसके कारण यहां मौसम का चक्र पूरी तरह बदल रहा है.

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