Hejaz Railway Project: तुर्की और सऊदी अरब ने मंगलवार को ऐतिहासिक ‘हेजाज रेलवे’ डील पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, जिसका मकसद क्षेत्रीय सहयोग और कनेक्टिविटी को बढ़ाना है. इस समझौते के साथ ही सऊदी अरब ऐतिहासिक हेजाज़ रेलवे को फिर से शुरू करने की प्रक्रिया में शामिल होने वाला सबसे नया देश बन गया है.
इस रेलवे प्रोजेक्ट को मिडिल ईस्ट के लिए गेमचेंजर माना जा रहा है.क्योकि ये रेलवे तुर्की, सीरिया, जॉर्डन और सऊदी अरब को आपस में जोड़ेगा. दरअसल, तुर्की के परिवहन मंत्री अब्दुलकादिर उरालोलु मंगलवार को सऊदी अरब के अपने समकक्षों के साथ बातचीत के लिए रियाद गए थे. आधिकारिक हस्ताक्षर समारोह के दौरान उरालोलु ने कहा कि ‘हमारे क्षेत्र के लिए इस संवेदनशील समय में व्यापार और लॉजिस्टिक्स चेन का बिना किसी रुकावट के चलना पहले से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है. ऐसे में परिवहन क्षेत्र के सामने आने वाली बाधाओं को दूर करना एक रणनीतिक आवश्यकता है.
क्या है ‘हेजाज रेलवे’ समझौता?
- अंकारा का लक्ष्य सीरिया, जॉर्डन और इराक से होकर गुजरने वाले परिवहन मार्गों को चालू करना.
- यह विशाल रेलवे नेटवर्क तुर्की को सीरिया, जॉर्डन और सऊदी अरब से जोड़ते हुए खाड़ी देशों ओमान तक को सीधे यूरोप से जोड़ने का एक महा-प्रोजेक्ट है.
- इस ऐतिहासिक रेल लाइन को आधुनिक बनाकर भूमध्य सागर और खाड़ी बाजारों के बीच एक मजबूत जमीनी मार्ग तैयार करना है.जो समुद्री रास्तों जैसे स्वेज नहर या होर्मुज जलडमरूमध्य पर निर्भरता को कम करेगा.
- हिजाज़ रेलवे लाइन की कुल लंबाई लगभग 1,322 किलोमीटर है जो सीरिया की राजधानी दमिश्क से शुरू होकर सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना तक जाती है.
- बाद में बनाए गए इसके विभिन्न साइड-ट्रैक्स और अन्य शाखाओं को जोड़कर इस पूरे पुराने नेटवर्क की कुल लंबाई करीब 1,900 किलोमीटर तक पहुंच जाती है.
इस बीच तुर्की के परिवहन मंत्री अब्दुलकादिर उरालोलु ने कहा कि ‘तुर्की से शुरू होकर इराक होते हुए सऊदी अरब तक जाने वाले दो ट्रायल रन ने साफ तौर पर इस रूट की व्यावहारिकता को साबित कर दिया है.’ पिछले साल से तुर्की बार-बार यह कहता रहा है कि वह ऐतिहासिक हेजाज़ रेलवे को फिर से शुरू करना चाहता है जो कभी इस्तांबुल से सऊदी अरब के पवित्र स्थलों तक जाती थी.