Hormuz Attack: होर्मुज में फिर एक जहाज पर फिर से हमला हो गया है. अमेरिकी मीडिया संस्थानों ने रिपोर्ट में दावा किया है कि ईरान ने ही ड्रोन से एक कंटेनर जहाज पर हमला किया है. इसके बाद होर्मुज में समुद्री आवाजाही को नियंत्रित करने वाली ईरानी एजेंसी ने चेतावनी भी दी है.
वहीं हमले के बाद संयुक्त राष्ट्र यानी UN ने तेल व्यापार के इस अहम समुद्री रास्ते में जंग की वजह से फंसे नाविकों को निकालने का काम फिलहाल रोक दिया है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पर्शियन गल्फ स्ट्रेट अथॉरिटी (PGSA) ने एक्स पर लिखा कि हमारे द्वारा तय किए गए नियमों के बाहर किसी भी रास्ते से गुजरने वाले जहाजों को सुरक्षित यात्रा की गारंटी नहीं मिलेगी.
UN ने क्रू को निकालने का काम रोका
बता दें कि PGSA ईरान द्वारा बनाया गया एक समुद्री नियामक संस्था है, जिसे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जहाजो की आवाजाही को मैनेज करने और सुरक्षा के लिए बनाया गया है. वहीं, इस हमले के बाद समुद्री सुरक्षा के लिए जिम्मेदार UN की संस्था अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) के महासचिव आर्सेनियो डोमिंगेज ने घोषणा करते हुए कहा कि जंग के कारण फंसे 600 जहाजों और उनके क्रू को निकालने का ऑपरेशन फिलहाल रोक दिया गया है.
IMO की निकासी योजना के तहत यात्रा नहीं कर रहा था जहाज
रिपोर्ट के अनुसार, आर्सेनियो डोमिंगेज ने एक बयान में कहा कि उन्होंने अभियान इसलिए रोका है जिससे यह दोबारा पुख्ता किया जा सके कि उनकी लिस्ट में शामिल जहाजों के लिए जरूरी सुरक्षा व्यवस्था अभी भी मौजूद है. उन्होंने बताया कि जिस जहाज पर हमला हुआ, वो IMO की निकासी योजना के तहत यात्रा नहीं कर रहा था.अर्थात वह फंसे नाविकों को लेकर जा रहा जहाज नहीं था.
रिपोर्ट के मुताबिक, हमला ड्रोन से हुआ है. वहीं ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी UKMTO का कहना है कि कंटेनर जहाज के दाईं ओर किसी अज्ञात चीज से हमला हुआ, जिससे जहाज का कंट्रोल रूम क्षतिग्रस्त हो गया. गनीात रही कि इस घटना में किसी के घायल होने या मरने की खबर नहीं है.
होर्मुज पर कंट्रोल छोड़ने को तैयार नहीं ईरान
बता दें कि युद्ध के दौरान ईरान ने इस जलडमरूमध्य को लगभग पूरी तरह बंद कर दिया था, नाकेबंदी कर दी थी, जिससे पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ा था. वहीं, अब अमेरिका से शुरुआती डील (MoU) के बाद ईरान ने कहा कि वह होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से फीस (टोल) लेने की योजना बना रहा है. वहीं, होर्मुज में ड्रोन हमलों की ऐसी घटनाओं से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत मुश्किल हो सकती है. बता दें कि दोनों देश फरवरी के आखिर में शुरू हुई जंग को खत्म करने के लिए पहले एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर चुके हैं और अब अंतिम समझौता करने की कोशिश कर रहे हैं.