पाकिस्तान के मंसूबो पर फिरा पानी! भारत ने चाबहार पोर्ट के फंडिंग पर लगाई रोक

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

India and Iran : ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने भारत के नए बजट में चाबहार पोर्ट के लिए फंडिंग न रखे जाने पर निराशा जताई है. उनका कहना है कि यह फैसला भारत और ईरान दोनों के लिए ही निराशाजनक है. ऐसे में अरागची की टिप्पणी से लगता है कि ईरान अभी भी भारत के साथ काम करना चाहता है और पोर्ट को आगे बढ़ाने की उम्मीद रखता है.

बता दें कि मीडिया से बातचीत के दौरान एक इंटरव्‍यू में अरागची से पूछा गया कि क्या भारत के इस साल के बजट में चाबहार को शामिल न करने से निराशा हुई है तो अरागची ने जवाब दिया, ‘मुझे ऐसा लगता है कि ये ईरान और भारत दोनों के लिए निराशाजनक है.’ इसके साथ ही उन्होंने चाबहार पोर्ट को ‘गोल्डन गेट’ बताया, जैसा कि प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने पहले कहा था.

भारत-ईरान के लिए सबसे अच्छा ट्रांजिट रूट

अरागची का कहना है कि ये पोर्ट भारतीय महासागर क्षेत्र को मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप से जोड़ता है. उनका मानना है कि अगर इसे पूरी तरह विकसित कर लिया जाए तो भारत के लिए ईरान के रास्ते मध्य एशिया, काकेशस और यूरोप तक पहुंचने का सबसे अच्छा ट्रांजिट रूट बन सकता है. इस दौरान उन्होंने उम्मीद जताई कि एक दिन ये पोर्ट पूरी तरह विकसित हो जाएगा.

चाबहार के लिए नो अमाउंट

बता दें कि 2026-27 के यूनियन बजट में पहली बार चाबहार पोर्ट के लिए कोई फंड नहीं रखा गया. उनका यह फैसला ऐसे समय आया जब अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढ़ा हुआ है. बता दें कि सितंबर 2025 में अमेरिका ने ईरान पर सख्त सैंक्शंस लगाए, इसके लिए भारत को छह महीने की छूट दी गई थी, जो अप्रैल 2026 में खत्म हो रही है.

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार भारत अभी भी पोर्ट का प्रमुख डेवलपमेंट पार्टनर बना हुआ है. इस मामले को लेकर एक्सटर्नल अफेयर्स मिनिस्ट्री के स्पोक्सपर्सन रणधीर जायसवाल ने पिछले महीने कहा था कि भारत अमेरिका के साथ चाबहार से जुड़े मुद्दों पर बात कर रहा है.

भारत-ईरान ने विकसित किया दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान

इसके साथ ही चाबहार पोर्ट ईरान के दक्षिण-पूर्वी प्रांत सिस्तान-बलूचिस्तान में स्थित है. ऐसे में भारत और ईरान ने मिलकर इसे विकसित किया है ताकि पाकिस्‍तान गए बिना अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधा ट्रेड और ट्रांजिट रूट बने. ये प्रोजेक्ट भारत की रीजनल कनेक्टिविटी बढ़ाता है, लैंडलॉक्ड मध्य एशियाई देशों तक ट्रेड को बढ़ावा देता है और पाकिस्तान के ग्वादर पोर्ट पर चीन के प्रभाव को काउंटर करता है.

सबसे महत्‍वपूर्ण बात भारत और ईरान के बीच 2024 में बड़ी डील हुई थी, जिसके तहत भारत ने पोर्ट के डेवलपमेंट में हिस्सा लिया. जानकारी के मुताबिक, पिछले बजट्स में भारत हर साल करीब 100 करोड़ रुपये आवंटित करता रहा है.

चाबहार भारत की स्ट्रैटेजिक पोजिशन के लिए बहुत अहम

इसके साथ ही चाबहार भारत की स्ट्रैटेजिक पोजिशन के लिए बहुत अहम है. बताया जा रहा है कि ये प्रोजेक्ट सिर्फ ट्रेड बढ़ाने के साथ भारत को मध्य एशिया तक पहुंचने का वैकल्पिक रास्ता देता है. साथ ही अमेरिकी सैंक्शंस और जियोपॉलिटिकल प्रेशर के कारण भारत ने बजट में फंडिंग रोक दी है, जो एक तरह का बैलेंस्ड अप्रोच दिखाता है.

 इसे भी पढ़ें :- भारत को ब्रह्मोस से भी ज्यादा खतरनाक मिसाइल देगा इजरायल, कांप उठेगा पाकिस्तान

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