2 साल का बैन कमजोर, IPL से हटने वाले खिलाड़ियों के खिलाफ बने सख्त नियम-सुनील गावस्कर

New Delhi: भारतीय क्रिकेट के दिग्गज सुनील गावस्कर ने IPL से आखिरी समय पर नाम वापस लेने वाले खिलाड़ियों के खिलाफ सख्त एक्शन लेने की मांग की है. पूर्व भारतीय कप्तान का मानना है कि मौजूदा दो साल के बैन का नियम खिलाड़ियों को नीलामी में चुने जाने के बाद टूर्नामेंट से हटने से रोकने के लिए काफी नहीं है. गावस्कर का यह बयान इंग्लैंड के बल्लेबाज बेन डकेट के हटने के बाद आया है.

डकेट ने आईपीएल 2026 से बना ली दूरी

डकेट को दिल्ली कैपिटल्स ने 2 करोड़ रुपए में खरीदा था. उन्होंने अंतरराष्ट्रीय करियर पर ध्यान देने की बात कहकर आईपीएल 2026 से दूरी बना ली. इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) एक ऐसी लीग है, जहां खेलने का सपना हर खिलाड़ी देखता है, लेकिन जब कोई खिलाड़ी आखिरी समय पर टूर्नामेंट से हट जाता है, तो ये न सिर्फ टीमों के लिए मुश्किल खड़ी करता है बल्कि फैंस को भी निराश करता है.

मौजूदा दो साल के बैन का नियम काफी नहीं

पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर का मानना है कि मौजूदा दो साल के बैन का नियम खिलाड़ियों को नीलामी में चुने जाने के बाद टूर्नामेंट से हटने से रोकने के लिए काफी नहीं है. डकेट के फैसले से टीम की तैयारियों को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि आखिरी समय में किसी खिलाड़ी का हटना टीम संतुलन बिगाड़ देता है.

बीसीसीआई की नीति पर सवाल

इस कड़ी पर पूर्व भारतीय कप्तान सुनील गावस्कर ने बीसीसीआई की नीति पर सवाल उठाए और कहा कि मौजूदा दो साल का बैन नियम काफी नहीं है. उनका मानना है कि अगर खिलाड़ी आखिरी समय में आईपीएल से हटते रहेंगे और उन पर कोई सख्त असर नहीं होगा, तो यह समस्या बनी रहेगी. उन्होंने सुझाव दिया कि बोर्ड को ऐसा नियम बनाना चाहिए, जिससे खिलाड़ियों पर वास्तविक दबाव पड़े.

बीसीसीआई को सोच विचार करने की जरूरत

गावस्कर ने कहा कि इस पर बीसीसीआई को सोच विचार करने की जरूरत है, क्योंकि दो साल का बैन साफ तौर पर काम नहीं कर रहा है. आपको ऐसी सजा के बारे में सोचना होगा, जिसका खिलाड़ियों पर असर पड़े. जब तक किसी खिलाड़ी के लिए आईपीएल में वापसी की संभावना पर असर नहीं पड़ेगा, तब तक ये नियम किसी काम का नहीं होगा.

नियम से मिल सकती है छूट

नियम ये है कि अगर कोई विदेशी खिलाड़ी नीलामी में चुने जाने के बाद टूर्नामेंट से हटता है तो उसे दो सीजन तक आईपीएल और फ्यूचर में ऑक्शन से बाहर रखा जा सकता है. हालांकि, अगर खिलाड़ी की चोट या मेडिकल कारण सही पाए जाते हैं तो उसे नियम से छूट मिल सकती है, लेकिन हाल ही के मामलों से ये साफ हो गया कि ये नियम खिलाड़ियों को रोकने के लिए काफी नहीं है.

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