Tehran: ईरान के भीतर मौजूद कट्टरपंथी गुट अमेरिका के साथ चल रही वार्ताओं में किसी भी महत्वपूर्ण रियायत के खिलाफ हैं. विशेष रूप से IRGC के प्रमुख नेता अहमद वहीदी और उनका करीबी समूह समझौते के लिए झुकने को तैयार नहीं दिख रहा. अमेरिका के प्रतिष्ठित थिंक टैंक इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) और क्रिटिकल थ्रेट्स प्रोजेक्ट (CTP) की नई रिपोर्ट में यह दावा किया गया है.
सैन्य विकल्प अभी भी मेज पर
इसी बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिया है कि यदि समझौता नहीं हुआ तो सैन्य विकल्प अभी भी मेज पर है. उन्होंने कहा कि उनकी प्राथमिकता ऐसा समझौता करना है जो यह सुनिश्चित करे कि ईरान परमाणु हथियार विकसित न कर सके. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह सैन्य टकराव की बजाय कूटनीतिक समाधान को प्राथमिकता देंगे.
लगातार संदेश देने की कोशिश
रिपोर्ट के मुताबिक ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए होने वाले समुद्री यातायात का प्रबंधन IRGC के नियंत्रण में रहना चाहिए. यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस व्यवस्था को स्वीकार करता है, तो यह अंतरराष्ट्रीय समुद्री नौवहन की स्वतंत्रता के लिए खतरनाक मिसाल बन सकती है. ISW-CTP के अनुसार, ईरानी सत्ता प्रतिष्ठान के भीतर कई धड़े मौजूद हैं, लेकिन अहमद वहीदी और उनके समर्थक अमेरिका के साथ बातचीत में किसी भी प्रकार की अर्थपूर्ण रियायत देने के पक्ष में नहीं हैं.
किसी प्रकार की नई पाबंदी पर कठोर
उनका रुख विशेष रूप से दो मुद्दों होर्मुज जलडमरूमध्य पर ईरान का नियंत्रण और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर किसी प्रकार की नई पाबंदी पर बेहद कठोर है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुछ व्यावहारिक नेता बातचीत को आगे बढ़ाना चाहते हैं, लेकिन अंतिम निर्णय लेने वाले प्रभावशाली हलकों में अभी भी कट्टरपंथियों का प्रभाव मजबूत बना हुआ है. हालिया रिपोर्टों के अनुसार, ईरान में सभी नेता एक जैसी सोच नहीं रखते.
अधिकतम शर्तों पर अड़े रहने की रणनीति
संसद अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf और कुछ अन्य नेताओं को अपेक्षाकृत व्यावहारिक माना जाता है, जबकि कट्टरपंथी गुट अमेरिका पर दबाव बनाए रखने और अधिकतम शर्तों पर अड़े रहने की रणनीति अपना रहा है.
इसे भी पढ़ें. इजराइल को लेबनान में मिली बड़ी सफलता, हिजबुल्लाह के रणनीतिक किले ब्यूफोर्ट कैसल पर किया कब्जा

