Tehran: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित हत्या के 50 दिन बाद भी उनका अंतिम संस्कार नहीं हो पाया है. खामेनेई की मौत 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हवाई हमले में हुई थी. हालांकि, मौत के 40 दिन पूरे होने पर देश भर में शोक सभाएं आयोजित की गई थीं. लेकिन, अभी तक खामेनेई के शव को नहीं दफनाया गया है.
कब और कहां दफनाया जाए?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरानी अधिकारी अभी तक इस बात पर फैसला नहीं ले पाए हैं कि उन्हें कब और कहां दफनाया जाए, क्योंकि सुरक्षा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. बताया जा रहा है कि ईरान सरकार बड़े सार्वजनिक अंतिम संस्कार से बच रही है, क्योंकि उसे डर है कि इस दौरान इज़राइल की ओर से हमले हो सकते हैं या फिर देश के अंदर अशांति भड़क सकती है. मौजूदा युद्ध जैसे हालात और लगातार तनाव के कारण किसी भी बड़े आयोजन को जोखिम भरा माना जा रहा है.
मौत ने क्षेत्रीय संघर्ष को और भड़काया
रिपोर्ट के अनुसार, खामेनेई की मौत ने क्षेत्रीय संघर्ष को और भड़का दिया. हालांकि, इस घटना के बाद भी ईरान में उस तरह की सार्वजनिक भीड़ या शोक प्रदर्शन नहीं देखा गया, जैसा 1989 में अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के निधन के समय हुआ था. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की सरकार को आंतरिक विरोध और संभावित प्रदर्शन का भी डर है. बड़े जनसमूह के इकट्ठा होने पर सरकार को नियंत्रण बनाए रखने में मुश्किल हो सकती है, इसलिए वह स्थिति को टाल रही है.
अंतिम संस्कार की योजना बढ़ते हमलों के कारण रद्द
खामेनेई को दफनाने के लिए मशहद को संभावित स्थान माना जा रहा है. यह उनका गृह शहर है और यहां स्थित इमाम रज़ा दरगाह धार्मिक रूप से महत्वपूर्ण है. साथ ही यहां सुरक्षा व्यवस्था भी ज्यादा मजबूत मानी जाती है. शुरुआत में 4 मार्च से तीन दिन के राजकीय अंतिम संस्कार की योजना बनाई गई थी, लेकिन अमेरिका और इज़राइल के बढ़ते हमलों के कारण इसे रद्द कर दिया गया. 8 अप्रैल को हुए अस्थायी युद्धविराम के बावजूद स्थिति अभी भी अनिश्चित बनी हुई है, जिससे अंतिम संस्कार की तारीख तय नहीं हो पा रही है.
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