Iran America War: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि वह जल्द से जल्द परमाणु समझौता करे, वरना उसे गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है. ट्रंप ने कहा कि यदि समझौता नहीं हुआ तो हालात “बहुत दर्दनाक” हो सकते हैं.
हमें समझौता करना ही होगा Iran America War
व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “हमें समझौता करना ही होगा, नहीं तो स्थिति बहुत कठिन और दर्दनाक हो जाएगी. मैं ऐसा नहीं चाहता, लेकिन समझौता जरूरी है.” समय सीमा के बारे में पूछे जाने पर ट्रंप ने कहा कि यह प्रक्रिया ज्यादा लंबी नहीं चलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि अगले एक महीने के भीतर कोई निर्णय हो जाना चाहिए और ईरान को जल्दी सहमत होना चाहिए.
बातचीत विफल रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं
ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि अगर बातचीत विफल रही तो हालात और बिगड़ सकते हैं. उन्होंने कहा, “अगर समझौता नहीं हुआ तो कहानी अलग होगी.” उनका कहना था कि यदि समझौता न्यायपूर्ण और अच्छा नहीं होगा, तो ईरान के लिए समय बहुत कठिन हो सकता है. यह बयान उस बैठक के एक दिन बाद आया, जो ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ की थी. ट्रंप ने कहा, “हमारी बैठक अच्छी रही और नेतन्याहू स्थिति को समझते हैं, लेकिन अंतिम फैसला मेरे हाथ में है.”
अगर समझौता नहीं हुआ तो “फेज़ 2” शुरू होगा
जब उनसे पूछा गया कि क्या नेतन्याहू चाहते हैं कि वह बातचीत रोक दें, तो ट्रंप ने कहा कि वह बातचीत तब तक जारी रखेंगे, जब तक उन्हें सही लगे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ तो “फेज़ 2” शुरू होगा, जो ईरान के लिए बहुत कठोर होगा. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि “फेज़ 2” में क्या कदम उठाए जाएंगे. ट्रंप के इन बयानों से साफ है कि अमेरिका एक तरफ बातचीत जारी रखना चाहता है, लेकिन दूसरी ओर ईरान पर दबाव भी बना रहा है.
क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है
ईरान का न्यूक्लियर प्रोग्राम पश्चिम एशिया में एक सेंट्रल फ्लैशपॉइंट बना हुआ है. ट्रंप के पहले कार्यकाल के दौरान अमेरिका 2015 की न्यूक्लियर डील से हट गया था. इसके बाद से परमाणु ईंधन के संवर्धन स्तर और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बना हुआ है. भारत के लिए खाड़ी क्षेत्र की स्थिरता आर्थिक और सामरिक रूप से बहुत महत्वपूर्ण है. भारत अपनी कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से इंपोर्ट करता है और इस क्षेत्र में बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी रहते हैं. अगर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता है, तो इसका असर तेल बाजार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है.

