UK: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की धमकी के बीच ईरान को दोहरा झटका देने की तैयारी चल रही है. ईरान में देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों को हिंसक तौर पर दबाने को लेकर यूरोपीय संघ (EU) ने वहां के अर्धसैनिक रिवोल्यूशनरी गार्ड पर कड़े प्रतिबंध लगाने की संभावना जताई है, जिससे ईरान पर दबाव और गहरा गया है. हालांकि ईरान ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है.
ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की धमकी का सामना
बता दें कि ईरान पहले ही ट्रंप की सैन्य कार्रवाई की धमकी का सामना कर रहा है. अमेरिका ने युद्धपोत (USS अब्राहम लिंकन) और निर्देशित मिसाइलों से लैस जहाजों को मध्य पूर्व भेजा है ताकि वे समुद्र से हमला कर सकें. ईरान ने भी धमकी दी है कि वह पूर्व संभावित हमले कर सकता है या पूरे मध्य पूर्व में व्यापक रूप से कार्रवाई कर सकता है. इसमें अमेरिकी सैन्य अड्डे और इज़राइल भी शामिल हैं.
आर्थिक संकटों के कारण विरोध-प्रदर्शन शुरू
ईरान की अर्थव्यवस्था पहले से ही अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जूझ रही है. यूरोप के इस कदम से उस पर और दबाव बढ़ेगा. गुरूवार को ईरान की मुद्रा रियाल गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर 16 लाख प्रति डॉलर पर पहुंच गई. इन्ही आर्थिक संकटों के कारण वहां विरोध-प्रदर्शन शुरू हुए थे जो बाद में सरकार के खिलाफ बड़े आंदोलन में बदल गए हैं. यूरोपीय संघ की विदेश एवं सुरक्षा मामलों की प्रमुख काजा कलास ने पत्रकारों से कहा कि यह संभावित है कि प्रतिबंध लगाए जाएंगे.
ईरान आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध
उन्होंने कहा कि इससे उन्हें अल-क़ायदा, हमास, IS की श्रेणी में डाला जाएगा. यदि आप आतंकवादी की तरह कार्य करते हैं तो आपको आतंकवादी ही माना जाना चाहिए. यूरोपीय आयोग की उपाध्यक्ष काजा कल्लास ने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर क्रूर दमन के दौरान 6,373 लोगों की हत्या करने वाले ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर को यूरोपीय संघ आतंकवादी संगठन के रूप में सूचीबद्ध करने जा रहा है. इस कदम के लिए यूरोपीय संघ के 27 सदस्य देशों के सर्वसम्मत समर्थन की आवश्यकता होगी. ईरान ने फिलहाल तुरंत कोई टिप्पणी नहीं की.
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