New Delhi: ईरान में जारी हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बीच दर्जनों कश्मीरी छात्र तेहरान में फंसे हुए हैं. इससे उनके परिजन परेशान हैं. हालांकि, तेहरान में एक कश्मीरी छात्र की वजह से परिवारों को अपने बच्चों की सुरक्षा की खबरों से कुछ राहत मिली थी. वहीं सिर्फ दो दिन बाद ही ईरान में हालात बिगड़ने से डर फिर से बढ़ गया है. इससे नाजुक शांति अब घबराहट में बदल गई है, क्योंकि माता-पिता ईरान के शहरों में फंसे अपने बच्चों को जल्द से जल्द निकालने की गुहार लगा रहे हैं.
भारत सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की अपील
दर्जनों परेशान माता-पिता श्रीनगर की प्रेस कॉलोनी में इकट्ठा हुए और भारत सरकार से तुरंत कार्रवाई करने की अपील की. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और जम्मू-कश्मीर प्रशासन से ईरान में तेजी से बिगड़ते हालात के बीच अपने बच्चों को निकालने को प्राथमिकता देने की अपील की. एक पिता ने दुख जताते हुए कहा कि हम रात को सो नहीं पा रहे हैं. हर घंटा एक दिन जैसा लग रहा है. उनकी बेटी तेहरान में ईरान यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिकल साइंसेज में पढ़ती है.
हमें नहीं पता कि वहां क्या हो रहा है?
उन्होंने आगे कहा कि हमें नहीं पता कि वहां क्या हो रहा है? इंटरनेट बंद है, पैसे भेजने के चैनल बंद हैं और कॉल भी नहीं लग रहे हैं. मेरी बच्ची ने बस इतना कहा कि बाबा, प्लीज हमें यहां से निकाल लो. मैं उसे क्या जवाब दूं? माता-पिता ने बताया कि पहले छोटे पेरेंट्स नेटवर्क के बीच मैसेज सर्कुलेट हो रहे थे, जिनसे यूनिवर्सिटी हॉस्टल के अंदर बच्चों की सुरक्षा की पुष्टि हो रही थी. लेकिन वीकेंड से वे अपडेट भी बंद हो गए हैं.
ईरान के अलग-अलग प्रांतों में पढ़ रहे हैं 2,000 कश्मीरी छात्र
दूतावास कह रहा है कि खुद ही निकल जाओ लेकिन वे कैसे निकल सकते हैं? वहां अफरा-तफरी मची हुई है. पुलवामा के एक पिता ने कहा कि जिनका बेटा शिराज में पढ़ता है. जेकेएसए के नेशनल कन्वीनर नासिर खुएहामी ने कहा कि लगभग 2,000 कश्मीरी छात्र तेहरान, उरुमिया, शिराज, इस्फहान और माज़ंदरान सहित ईरान के अलग-अलग प्रांतों में पढ़ रहे हैं. कॉल पर माता-पिता रो रहे हैं. हमने दूतावास और छात्रों के बीच चौबीसों घंटे कम्युनिकेशन लाइनें शुरू करने का अनुरोध किया है.
अब सिर्फ आश्वासन काफी नहीं
साथ ही अगर हालात और बिगड़ते हैं तो इमरजेंसी इवैक्यूएशन प्लान भी मांगा है. हालांकि माता-पिता का कहना है कि अब सिर्फ आश्वासन काफी नहीं है. एक और माता-पिता ने कहा कि हमें सिर्फ बयान नहीं चाहिए. हमें कार्रवाई चाहिए. हमारे बच्चे हजारों किलोमीटर दूर फंसे हुए हैं और हमसे संपर्क करने का कोई तरीका नहीं है. हम प्रधानमंत्री व जयशंकर साहब से अपील करते हैं.. प्लीज, उन्हें घर ले आइए. हम बस यही चाहते हैं.
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