Iran-US War: युद्ध के 12 वें बुधवार को ईरान ने मुस्लिम देशों और समुदायों से एक बड़ी अपील की है. ईरानी सेना के प्रवक्ता अबोलफजल शेकरची ने पड़ोसी देशों और दुनिया भर के मुस्लिमों से कहा है कि यदि उनके पास अमेरिकी या इजराइली सैनिकों के ठिकानों की जानकारी हो तो उसे ईरान के साथ साझा करें. ईरान का कहना है कि इससे सटीक स्थानों पर हमला किया जा सकेगा और आम नागरिकों को नुकसान से बचाया जा सकेगा.
आम नागरिकों को बना रहे निशाना
ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका और इजराइल युद्ध में महिलाओं, बच्चों और आम नागरिकों को निशाना बना रहे हैं. ईरानी सेना के मुताबिक ऐसा इसलिए किया जा रहा है क्योंकि वे सीधे ईरानी सेना का सामना करने में सक्षम नहीं हैं. रिपोर्टों के अनुसार इस संघर्ष का असर अमेरिकी सेना पर भी पड़ा है. बताया गया है कि अब तक करीब 140 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जबकि 7 सैनिकों की मौत की पुष्टि की गई है.
8000 घरों को नुकसान, 1300 से अधिक की मौत
ईरान का दावा है कि उसके देश में हुए हमलों में लगभग 8000 घरों को नुकसान पहुंचा है और 1300 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. इस बीच सऊदी अरब ने भी संभावित खतरे को देखते हुए अपने तेल निर्यात का रास्ता बदलना शुरू कर दिया है. ईरान द्वारा Strait of Hormuz को बंद करने की आशंका के बीच सऊदी की सरकारी तेल कंपनी Saudi Aramco ने कुछ खरीदारों से कहा है कि वे तेल की खेप अब Yanbu Port से उठाएं, जो Red Sea के किनारे स्थित है.
Egypt ने भी की सहायता की पेशकश
आम तौर पर सऊदी अरब अपना लगभग 90% तेल Ras Tanura Port से निर्यात करता है, जो होर्मुज मार्ग से जुड़ा है. जोखिम बढ़ने के कारण अब तेल को पूर्व-पश्चिम पाइपलाइन के जरिए यनबू तक भेजा जा रहा है. Egypt ने भी सहायता की पेशकश की है. उसने कहा है कि उसकी SUMED Pipeline के माध्यम से सऊदी तेल को भूमध्य सागर तक पहुंचाया जा सकता है.
इसे भी पढ़ें. US में पत्नी की हत्या करने वाले फरार भारतीय युवक की तलाश तेज, ढूंढ़ने वाले को मिलेगा 9.2 करोड़ का इनाम