US के दबाव के बावजूद श्रीलंका ने 230 से अधिक ईरानी नौसैनिक वापस भेजे, विमान से किए रवाना

New Delhi: अमेरिकी दबाव के बावजूद श्रीलंका ने ईरानी नौसेना के दो जहाजों के 230 से अधिक नाविकों को स्वदेश रवाना कर दिया है. रक्षा अधिकारियों ने बुधवार को बताया कि अमेरिकी पनडुब्बी हमले और इंजन फेल होने की घटनाओं के बाद ये सभी यहां फंसे हुए थे. कुल 238 नाविकों को मंगलवार देर रात तुर्किये की एक एयरलाइन के विमान से वापस भेजा गया.

84 नाविकों की हो गई थी मौत 

चार मार्च को ईरान का नौसैनिक जहाज आईरिस डेना श्रीलंका के अंतरराष्ट्रीय जल क्षेत्र के बाहर अमेरिकी हमले का शिकार हुआ था, जिसमें 84 नाविकों की मौत हो गई थी. इस घटना में 32 अन्य लोगों को श्रीलंका ने बचाया था. इसके तीन दिन बाद ईरान के दूसरे जहाज आईरिस बुशहर को इंजन खराब होने की सूचना के बाद श्रीलंका के जल क्षेत्र में प्रवेश की अनुमति दी गई थी.

दोनों जहाजों के थे 238 नाविक

इस जहाज पर सवार 200 से अधिक लोगों को कोलंबो के पास स्थित नौसेना के वेलिसारा केंद्र में ठहराया गया. रक्षा अधिकारियों के अनुसार मंगलवार को वापस भेजे गए 238 नाविक दोनों जहाजों के थे. आईरिस डेना के कुछ बचे हुए लोगों को गाले के पास स्थित श्रीलंकाई वायुसेना के कोग्गाला केंद्र में रखा गया था, जहां उनका एक राष्ट्रीय अस्पताल में इलाज चल रहा था.

दोनों पक्षों के बीच फंसा हुआ है श्रीलंका 

श्रीलंका स्थित ईरानी दूतावास ने 14 मार्च आईरिस डेना पर अमेरिकी हमले में मारे गए 84 नाविकों के शवों को स्वदेश भेज दिया था. प्रतीत होता है कि श्रीलंका इस संघर्ष में दोनों पक्षों के बीच फंसा हुआ महसूस करता है. वह ईरान और अमेरिका दोनों के साथ अच्छे संबंध बनाए रखने के साथ-साथ किसी को भी नाराज करने से बचना चाहता है.

अमेरिका ने श्रीलंका पर बनाया था दबाव 

बता दें कि अमेरिका ने श्रीलंका पर दबाव बनाया था कि वह डूबे ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना के बचे हुए क्रू सदस्यों और दूसरे ईरानी जहाज के नाविकों को ईरान वापस न भेजे. यह मामला ऐसे समय सामने आया था जब क्षेत्र में सैन्य टकराव और कूटनीतिक खींचतान तेज हो गई थी.

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