बता दें कि पिकएक्स माउंटेन की लोकेशन ईरान के प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठान नतांज से महज दो किलोमीटर दूर है. ऐसे में सवाल है कि आखिर इस पहाड़ के भीतर ऐसा क्या है, जिसे लेकर अमेरिका बार-बार चेतावनी दे रहा है?
क्या है पिकएक्स माउंटेन, कहां है इसका ठिकाना?
दरअसल, पिकएक्स माउंटेन ईरान के इस्फहान प्रांत में स्थित एक पहाड़ी क्षेत्र है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘कूह-ए कोलांग गज ला’ कहा जाता है. अंग्रेजी में इसका नाम पिकएक्स माउंटेन इसलिए पड़ा, क्योंकि ‘कोलांग’ का अर्थ कुदाल या पहाड़ खोदने वाले औजार से जुड़ा है. यह पहाड़ी ईरान के प्रमुख परमाणु प्रतिष्ठान नतांज से करीब दो किलोमीटर दक्षिण में स्थित है. वहीं, राजधानी तेहरान से इसकी दूरी लगभग 220 किलोमीटर है. इस पहाड़ के भीतर गहरी सुरंगों का एक बड़ा परिसर विकसित किया गया है. इसमें दो अलग-अलग सुरंग परिसरों के प्रवेश मार्ग बनाया गया है, ताकि वहां मौजूद संभावित गतिविधियों को बाहरी हमलों से सुरक्षा मिल सके.
पहाड़ के अंदर क्या बना रहा है ईरान?
पिकएक्स माउंटेन को लेकर पश्चिमी देशों के परमाणु विशेषज्ञों की सबसे बड़ी चिंता इसकी अंडरग्राउंड संरचना और संभावित इस्तेमाल को लेकर है. दरअसल, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान यहां यूरेनियम संवर्धन का एक ऐसा केंद्र विकसित कर रहा है, जिसे हवाई हमलों से बचाना आसान हो. बता दें कि यूरेनियम संवर्धन यानी यूरेनियम में एक खास आइसोटोप की मात्रा बढ़ाने की प्रक्रिया. दकअसल, कम संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु ऊर्जा संयंत्रों में ईंधन के तौर पर किया जा सकता है. लेकिन बहुत अधिक संवर्धन होने पर इसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में भी संभव है. यही वजह है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों को शक है कि पहाड़ के भीतर ऐसी सुविधा विकसित होने से ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को जारी रखने में सक्षम हो सकता है.
नतांज और फोर्दो के बाद अब पिकएक्स माउंटेन पर नजर
ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े नतांज और फोर्दो जैसे ठिकाने पहले भी अंतरराष्ट्रीय तनाव का केंद्र रहे हैं. इन प्रतिष्ठानों पर हुए हमलों के बाद भी पिकएक्स माउंटेन लगातार चर्चा में बना हुआ है. यही वजह है कि ट्रंप प्रशासन इसे संभावित सैन्य लक्ष्यों में शामिल बताता रहा है. ट्रंप की ताजा टिप्पणी से संकेत मिला है कि अमेरिका की नजर अब भी ईरान के उन ठिकानों पर है, जिन्हें वह अपने परमाणु कार्यक्रम के लिहाज से अहम मानता है. हालांकि, किसी ठिकाने को निशाना बनाने की धमकी देना और उसे पूरी तरह नष्ट कर पाना दो अलग-अलग बातें हैं. पिकएक्स माउंटेन की गहराई और चट्टानी संरचना किसी भी सैन्य कार्रवाई को मुश्किल बना सकती है.
IAEA ने नहीं किया निरीक्षण
इस पूरे मामले में सबसे अहम तथ्य यह है कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) ने अभी तक इस अंडरग्राउंड परिसर का निरीक्षण नहीं किया है. ऐसे में यह स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है कि वहां कौन से उपकरण मौजूद हैं, क्या यूरेनियम संवर्धन की गतिविधियां शुरू हुई हैं और इस परिसर का वास्तविक इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जाना है. हालांकि ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है. दूसरी तरफ अमेरिका और पश्चिमी देशों को उसके यूरेनियम संवर्धन और भूमिगत परमाणु ढांचे को लेकर संदेह है. यही अनिश्चितता पिकएक्स माउंटेन को इतना अहम बना रही है.