सऊदी-तुर्की-पाकिस्तान डील ने ईरान को शिया-सुन्नी भाईचारें की दिलाई याद, अमेरिका-इजरायल को लेकर कही ये बात

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Iran On Muslim Unity: पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच बने नए रक्षा समझौते के बाद क्षेत्रीय समीकरण तेजी से बदलते दिख रहे हैं. ईरान के राष्ट्रपति ने मुस्लिम एकता की बड़ी बात कही है, जिसमें उन्होंने अमेरिका और इजरायल पर खाड़ी देशों को ईरान के खिलाफ भड़काने का आरोप लगाया है, साथ ही मुस्लिम एकता की जोरदार अपील भी की है.
पेजेश्कियन ने कहा कि अमेरिका और इजरायल मिलकर फारस की खाड़ी के देशों को ईरान के खिलाफ करने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि देश के अंदर अलग-अलग विचारों के चलते चुनौतियां मौजूद हैं और दुश्मन ताकतें इसी का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं. इतना ही नहीं,पेजेश्कियन ने ये भी कहा है कि सरकार और सेना के बीच किसी तरह का टकराव नहीं है और ईरान पूरी तरह एकजुट है, लेकिन अलग-अलग नजरियों की वजह से चुनौतियां जरूर हैं.

‘सारे मुसलमान भाई हैं’

इस दौरान पेजेश्कियन का सबसे बड़ा संदेश मुस्लिम एकता को लेकर था, जिसमे उन्होंने कहा कि शिया और सुन्नी का फर्क भुलाकर सभी मुस्लिम देशों को एक साथ रहना चाहिए. यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की मिलकर नया रक्षा गठजोड़ बना रहे हैं, जिसे क्षेत्र में नए पावर ब्लॉक के तौर पर देखा जा रहा है. खास बात है कि ये तीनों ही देश सुन्नी बाहुल्य है. वहीं ईरान शिया देश है.
पेजेश्कियन ने अमेरिका और चीन के रिश्तों का उदाहरण देते हुए कहा कि हर देश को यह समझना चाहिए कि कब लड़ना है और कब अपने काम पर ध्यान देना है. चीन अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिद्वंद्वी होने के बाद भी सीधे टकराव से बचता है और लगातार मजबूत होता जा रहा है. यह साफ तौर पर रणनीतिक संयम दिखाने वाला संकेत कहा जा रहा है.

होर्मुज स्ट्रेट पर दी सफाई

ईरानी राष्ट्रपति ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों के खिलाफ की गई कार्रवाई पर भी सफाई देते हुए कहा कि केवल उन्हीं जहाजों पर कार्रवाई की गई जिन्होंने नियमों का उल्लंघन किया. ऐसे में नाराजगी जताते हुए उन्होंने कहा कि कुछ लोग उन्हें ‘गद्दार’ तक कह रहे हैं, जो सही नहीं है.

‘न झुकेंगे, न पीछे हटेंगे’

ईरानी राष्ट्रपति ने साफ किया कि उनका देश किसी दबाव में झुकने वाला नहीं है. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि कोई यह साबित कर दे कि ईरान ने कहीं आत्मसमर्पण किया है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर अधिकार मिल जाते हैं तो जंग जारी रखने की जरूरत नहीं, यानी बातचीत का दरवाजा पूरी तरह बंद भी नहीं किया गया है.

क्या है पाकिस्तान-सऊदी-तुर्की का त्रिपक्षीय समझौता?

बता दें कि हाल ही में पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की के बीच ‘मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट’ पर हस्ताक्षर हुए हैं, जिसका मकसद रक्षा सहयोग बढ़ाना, साझा सुरक्षा रणनीति बनाना और क्षेत्र में बढ़ते तनाव के बीच सामूहिक ताकत दिखाना है. इस समझौते के तहत यदि तीनों में से किसी देश पर हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा.
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