व्हाइट हाउस ने जारी की अमेरिकियों पर ईरान के हमले की लिस्ट, बताया-“दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश”  

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Iran US Clash: पिछले पांच दशकों से अमेरिका ईरान पर यह आरोप लगता रहा है कि वह मध्य पूर्व और अन्य क्षेत्रों में अमेरिकी नागरिकों व सैन्यकर्मियों को निशाना बनाने वाले हमलों में प्रत्यक्ष रूप से संलिप्त है या उन्हें संरक्षण प्रदान कर रहा है. इसी बीच सोमवार को जारी किए एक बयान में व्‍हाइट हाउस ने ईरान को “दुनिया का सबसे बड़ा आतंकवाद को बढ़ावा देने वाला देश” बताया और कहा कि “ईरान ने दुनिया के किसी भी दूसरे आतंकवादी शासन से ज्यादा अमेरिकियों को मारा है.”

व्हाइट हाउस द्वारा जारी बयान में कहा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप “वह कर रहे हैं जो पिछले पांच दशकों के राष्ट्रपतियों ने करने से मना कर दिया था, खतरे को हमेशा के लिए खत्म करना.”

ईरान की नौसेना और मिसाइलों को खत्‍म करना है मकसद

इसमें आगे कहा गया कि “ईरान की मिसाइलों को नष्ट करके, उनकी नौसेना को खत्म करके और यह पक्का करके कि वे कभी न्यूक्लियर हथियार हासिल न कर सकें, ट्रंप सरकार का बड़ा और अहम कदम अमेरिकी लोगों की जान बचा रहा है और अमेरिकी हितों को आगे बढ़ा रहा है.”

क्‍या है ईरान और उसके प्रॉक्‍सी से जुडे हमलों का रिकॉर्ड?

ईरान और उसके प्रॉक्सी से जुड़े हमलों का एक आंशिक रिकॉर्ड बताते हुए व्हाइट हाउस ने कहा कि नवंबर 1979 में, शासन के समर्थन वाले ईरानी स्टूडेंट्स ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा कर लिया था और 444 दिनों के स्टैंडऑफ में 66 अमेरिकियों को बंधक बना लिया था.

अप्रैल 1983 में, बेरूत में अमेरिकी दूतावास पर एक सुसाइड कार बम धमाके में 17 अमेरिकी मारे गए. कुछ महीने बाद, अक्टूबर 1983 में, बेरूत में एक मरीन कंपाउंड में ट्रक बम धमाके में 241 अमेरिकी सेना के लोग मारे गए.

1980 और 1990 के दशक में, कई बम धमाकों, हाइजैकिंग और किडनैपिंग के लिए ईरान के समर्थन वाले समूहों को जिम्मेदार ठहराया गया, जिनमें हिजबुल्लाह, हमास और इस्लामिक जिहाद शामिल थे. इनमें 1996 में सऊदी अरब में अमेरिकी एयर फोर्स हाउसिंग कॉम्प्लेक्स पर ट्रक बम धमाका शामिल था, जिसमें 19 अमेरिकी एयरमैन मारे गए थे और लगभग 500 दूसरे घायल हुए थे, और 1998 में केन्या और तंजानिया में अमेरिकी दूतावास पर हुए बम धमाके शामिल थे, जिसमें एक दर्जन अमेरिकियों समेत 224 लोग मारे गए थे.

बयान में इराक युद्ध के दौरान हुए हमलों का भी जिक्र किया गया. 2003 और 2011 के बीच, ईरान के समर्थन वाले मिलिशिया ने इराक में कम से कम 603 अमेरिकी सैनिकों को मार डाला, जिसे “इराक में लड़ाई में मारे गए हर छह अमेरिकी सैनिकों में से लगभग एक” बताया गया.

जनवरी 2007 में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कुद्स फोर्स से जुड़े बंदूकधारियों ने इराक के कर्बला में पांच अमेरिकी सैनिकों को मार डाला. अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, मार्च 2007 में, पूर्व एफबीआई एजेंट रॉबर्ट लेविंसन ईरान में गायब हो गए और शायद जेल में उनकी मौत हो गई.

व्हाइट हाउस ने जारी की विभिन्‍न हमलों की लिस्‍ट

हाल ही में, व्हाइट हाउस ने इराक, सीरिया और जॉर्डन में रॉकेट और ड्रोन हमलों को लिस्ट किया. जनवरी 2024 में, ईरान के समर्थन वाले कताइब हिजबुल्लाह के आतंकवादियों ने जॉर्डन में एक अमेरिकी बेस पर ड्रोन हमले में तीन अमेरिकी सैनिकों को मार डाला और 40 से ज्यादा लोगों को घायल कर दिया.

इसमें कहा गया है कि अक्टूबर 2003 और नवंबर 2024 के बीच, ईरान और उसके प्रॉक्सी ने मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना के खिलाफ 180 से ज्यादा हमले किए, जिसमें 180 से ज्यादा सेवा सदस्य घायल हुए और तीन मारे गए.

7 अक्टूबर को इजरायल में हुए हमले का भी किया जिक्र

व्हाइट हाउस ने अक्टूबर 2023 का भी जिक्र किया, जब 7 अक्टूबर को इजरायल में हुए हमलों के दौरान “ईरान-समर्थित हमास आतंकवादियों ने 46 अमेरिकियों को मार डाला और कम से कम 12 अमेरिकियों को किडनैप कर लिया.”

इसमें कहा गया, “नवंबर 2024: एक ईरानी नागरिक और आईआरजीसी के एक एसेट पर राष्ट्रपति ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का आरोप लगाया गया.” अमेरिका ने 1984 से ईरान को आतंकवाद का स्पॉन्सर करने वाला देश बताया है, जिसका कारण पूरे इलाके में हथियारबंद ग्रुप्स को उसका समर्थन है.

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