अमेरिका-इजरायल की मदद करने वाले ईरानी नागरिकों को मिलेगी मौत की सजा, दो पर कसा शिकंजा

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Iran US Relations: अमेरिका के साथ जारी संघर्ष के बीच ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर किसी ने भी यूएस-इजरायल को तस्वीरें या किसी भी तरह की जानकारी भेजी तो उसे मौत की सजा दी जाएगी. ईरान की न्यायपालिका के प्रवक्ता असगर जहांगीर ने यह जानकारी दी है. असगर जहांगीर ने कहा कि “अमेरिका या इजरायल को कोई भी जानकारी देने पर मौत की सजा हो सकती है.” अमेरिका ने अपने ताजा हमले में ईरान के तेल भंडार को निशाना बनाया. इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हमले के वीडियो को भी साझा किया. इसके बाद ही ईरान की तरफ से यह फैसला सामने आया है.

जहांगीर ने ईरानी मीडिया में सामने आए एक बयान में कहा कि पिछले अक्टूबर में पास हुए एक बेहतर जासूसी कानून के तहत, दुश्मन सरकारों (अमेरिका और इजरायल) को कोई फोटो या वीडियो भेजने पर सारा सामान जब्त करने और मौत की सजा हो सकती है.

अमेरिका और इजरायल को जानकारी भेजने के आरोप में दो गिरफ्तार

जहांगीर ने कहा कि “जब तबाही वाले क्षेत्र की फोटो ली जाती है, तो दुश्मन को बताया जाता है कि टारगेट सही जगह पर है. ऐसी जानकारी देना दुश्मन के साथ इंटेलिजेंस में सहयोग करने जैसा ही है.” ईरान के अधिकारियों ने पहले अमेरिका और इजरायल को जानकारी भेजने के आरोप में दो लोगों को गिरफ्तार किया था. इसके साथ ही इस मामले में ईरानी सरकार ने कार्रवाई करते हुए दो अन्य लोगों को मौत के घाट उतार दिए.

इन पर कथित तौर पर देशविरोधी गतिविधियों में शामिल होने के आरोप थे. तस्नीम न्यूज एजेंसी के मुताबिक, उत्तर-पश्चिमी ईरान में सुरक्षा बल ने दो लोगों को गिरफ्तार किया. इन पर अमेरिका-इजरायली जासूसी सर्विस को संवेदनशील जगहों की जानकारी भेजने के आरोप लगाए गए. तस्नीम न्यूज एजेंसी ने बताया कि दोनों ने कथित तौर पर सुरक्षित जगहों की जानकारी देने के बदले क्रिप्टोकरेंसी ली थी.

उन्होंने बताया कि उन्हें पूर्वी अजरबैजान प्रांत के ओस्कू इलाके से हिरासत में लिया गया और न्यायिक अधिकारियों को सौंप दिया गया. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने इस हफ्ते की शुरुआत में देश में पैरामिलिट्री इराकी फोर्स के काफिले का स्वागत करने के बाद इराक के लोगों का शुक्रिया अदा किया है. पेजेश्कियन ने एक्स पर लिखा कि “इराकी मुस्लिम लोग इस गलत लड़ाई में ईरान के साथ बहादुरी से खड़े रहे. यह रवैया जगह की मजबूरी की वजह से नहीं, बल्कि इतिहास, पहचान और साझा धार्मिक मूल्यों की वजह से है. मैं इराकी लोगों, अधिकारियों और लड़ाकों से दिल से हाथ मिलाता हूं.”

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